तेलंगाना पुलिस ने बिहार से 5 साइबर अपराधियों को दबोचा, 3.5 करोड़ की ठगी का खुलासा
हैदराबाद, 20 अगस्त 2026 – तेलंगाना पुलिस ने एक अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए बिहार के नालंदा और नवादा जिलों से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह फर्जी वेबसाइट और ऑनलाइन लोन स्कीम के जरिए देशभर में करीब ₹3.5 करोड़ की ठगी कर चुका है। इस मामले में अब तक पूरे देश में 498 साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज हैं, जिनमें अकेले तेलंगाना में 90 मामले शामिल हैं।
फर्जी फ्रेंचाइजी के नाम पर ठगी का खुलासा
तेलंगाना के आदिलाबाद जिले के जैनाथ थाने में दर्ज एक शिकायत के आधार पर जांच शुरू हुई थी। एक स्थानीय निवासी ने शिकायत दर्ज कराई थी कि उसे उर्वरक कंपनी की फ्रेंचाइजी दिलाने के नाम पर ₹3.85 लाख की ठगी की गई। पुलिस ने बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल लेन-देन की तकनीकी जांच के आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई। पुलिस को यह भी पता चला कि आरोपी अपनी बिहार में सामान्य जीवनशैली बनाए रखते हुए ऑनलाइन चैनलों के जरिए देश भर में लोगों को निशाना बना रहे थे।
ऐसे रचा जाता था ठगी का जाल
आरोपियों ने एक फर्जी उर्वरक कंपनी की वेबसाइट बनाई थी, जिसमें ऑनलाइन आवेदन की सुविधा दी गई थी। इच्छुक लोगों से आधार कार्ड, पैन कार्ड, फोटो और बैंक खाते की जानकारी मांगी जाती थी। इसके बाद उन्हें कई चरणों में सर्विस चार्ज, लाइसेंस फीस और ट्रेड ट्रांसफर फीस जैसे नामों पर पैसे देने को कहा जाता था और पैसे मिलने के बाद आरोपी संपर्क करना बंद कर देते थे। इसके अलावा, गिरोह ऑनलाइन लोन की तलाश कर रहे लोगों को निशाना बनाकर लोन प्रोसेसिंग, वेरिफिकेशन और अन्य शुल्क के नाम पर भी पैसे ऐंठता था।
पुलिस ने आरोपियों से 10 मोबाइल फोन और ₹70,000 नकद बरामद किए हैं। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने ठगी की राशि में से करीब ₹8 लाख को बैंक खातों और शेयर बाजार में निवेश किया था, जिसे कानूनी प्रक्रिया के तहत जब्त या फ्रीज कर दिया गया है। पुलिस अब उनके डिजिटल संपर्कों, अन्य संभावित पीड़ितों और गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों का पता लगाने के लिए जब्त किए गए डिवाइसों की जांच कर रही है।
साइबर अपराध विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार की ठगी में अपराधी फर्जी वेबसाइटों के जरिए लोगों में विश्वसनीयता का एक झूठा भ्रम पैदा करते हैं। जब वे आधार, पैन और बैंक डिटेल हासिल कर लेते हैं, तो इसी जानकारी का उपयोग करके आगे भुगतान की मांग करते हैं। विशेषज्ञ किसी भी भुगतान से पहले कंपनी, वेबसाइट और संपर्क विवरण की स्वतंत्र रूप से जांच करने की सलाह देते हैं। पुलिस ने कहा कि मामले की जांच जारी है और अन्य संदिग्धों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
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