भागलपुर: सुल्तानगंज से साइबर गिरोह को सिम सप्लाई करने वाला POS एजेंट गिरफ्तार, 122 ठगी के मामले उजागर
भागलपुर पुलिस ने साइबर ठगों को फर्जी सिम कार्ड उपलब्ध कराने वाले एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। साइबर डीएसपी विनय रंजन के नेतृत्व में पुलिस ने इस नेटवर्क से जुड़े एक पीओएस (प्वाइंट ऑफ सेल) एजेंट को गिरफ्तार किया है, जो सुल्तानगंज से सिम खरीदकर अंतरराज्यीय साइबर अपराधियों को सप्लाई करता था। आरोपी की पहचान मो. अब्दुल मतीन (निवासी बरहपुरा, इशाकचक, भागलपुर) के रूप में हुई है।
छह महीने में 81 से अधिक फर्जी सिम जारी
पुलिस के अनुसार, आरोपी ने पिछले छह महीनों में 81 से अधिक फर्जी सिम कार्ड जारी कर उन्हें साइबर अपराधियों को बेचा था, जिनका इस्तेमाल झारखंड और पश्चिम बंगाल में 122 साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम देने के लिए किया गया। आरोपी को तिलकामांझी थाना क्षेत्र के कचहरी चौक से गिरफ्तार किया गया, जहां से पुलिस ने उसके पास से एक मोबाइल फोन और एक स्कूटी बरामद की है। पूछताछ में आरोपी ने अपने सहयोगी मो. आफताब (निवासी जैनपुर, शाहकुंड, भागलपुर) का नाम भी उजागर किया है।
मुफ्त रिचार्ज के झांसे में फंसाता था ग्रामीणों को
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी सुल्तानगंज के एक डिस्ट्रीब्यूटर से थोक में सिम कार्ड खरीदता था। इसके बाद वह अपने सहयोगी के साथ गांव-गांव घूमकर लोगों को “सिम पोर्ट कराने और तीन महीने का मुफ्त रिचार्ज व डेटा” देने का झांसा देता था। इस बहाने वह लोगों के आधार कार्ड, फोटो और बायोमेट्रिक ले लेता था और उनकी जानकारी के बिना एक व्यक्ति के नाम पर कई सिम कार्ड एक्टिव करा लेता था। शाहकुंड के पंचरुखी के छह से अधिक लोगों ने पुलिस को बताया कि उनके नाम पर फर्जी सिम निकाले गए हैं।
साइबर अपराध एवं सुरक्षा इकाई (CCSU) को मिली सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार, फर्जी सिम कार्ड साइबर अपराधियों के लिए “अदृश्य” होने का सबसे आसान माध्यम हैं, क्योंकि इनसे अपराधियों की पहचान नहीं हो पाती। इस मामले में साइबर थाना कांड संख्या 61/26 (दिनांक 24.08.2026) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है। पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे अपनी निजी जानकारी (आधार, फोटो, बायोमेट्रिक) किसी अनजान व्यक्ति को न दें और किसी भी “मुफ्त रिचार्ज” या “पोर्टिंग” के झांसे में न आएं।
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