
Payment and Settlement Systems संशोधन बिल से MDR लागू होने की चर्चा तेज; जानें आम ग्राहकों और व्यापारियों पर क्या होगा असर
📍 नई दिल्ली | बिजनेस डेस्क
भारत में रोजाना करोड़ों लोगों की जीवनशैली का हिस्सा बन चुके UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। सरकार के प्रस्तावित Payment and Settlement Systems (Amendment) Bill के बाद UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने की संभावना को लेकर सियासी और कारोबारी गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।
वर्तमान में UPI लेनदेन पर व्यापारियों से कोई MDR शुल्क नहीं लिया जाता है। हालांकि, इस नए प्रस्तावित संशोधन कानून के माध्यम से सरकार को भविष्य में आवश्यकतानुसार UPI लेनदेन पर सीमित MDR लागू करने का कानूनी आधार मिल सकता है।
💡 क्या होता है MDR? MDR (Merchant Discount Rate) वह शुल्क है जो व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार करने के बदले बैंक या फिनटेक पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देते हैं।
🛒 बड़े कारोबारियों और हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन पर हो सकता है विचार
विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार आम उपभोक्ताओं पर सीधे कोई चार्ज लगाने के पक्ष में नहीं है। हालांकि, बड़े कमर्शियल संस्थानों और अधिक मूल्य वाले (High-Value) UPI ट्रांजैक्शन पर सीमित दायरा तय करके MDR लगाने के विकल्पों पर मंथन किया जा रहा है। यदि व्यापारियों पर अतिरिक्त लागत आती है, तो इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव सेवाओं और वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
🏦 क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?
बैंकिंग और फिनटेक विशेषज्ञों का मानना है कि देश भर में UPI इंफ्रास्ट्रक्चर के अभूतपूर्व विस्तार के कारण बैंकों और डिजिटल वॉलेट कंपनियों पर सर्वर रखरखाव और परिचालन लागत (Operational Costs) काफी बढ़ गई है। डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए यह कानूनी संशोधन प्रस्तावित किया गया है। फिलहाल ग्राहकों के लिए UPI पूरी तरह मुफ्त है और अंतिम नियम संसद में बिल पास होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।



