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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: BCI अध्यक्ष मनन मिश्रा का 5 साल का कार्यकाल विस्तार खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के कार्यकाल को पांच वर्ष तक बढ़ाने के फैसले पर रोक लगाते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने स्पष्ट किया कि मिश्रा केवल “अंतरिम अध्यक्ष” (Pro tem Chairman) हैं, जो नए BCI के गठन तक दिन-प्रतिदिन के कामकाज को देख सकते हैं। अदालत ने कहा कि उनकी स्थिति की तुलना लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित पदाधिकारी से नहीं की जा सकती।

यह आदेश मिश्रा के कार्यकाल को 2030 तक बढ़ाने के BCI के प्रस्ताव के खिलाफ दायर जनहित याचिकाओं (PILs) पर सुनवाई के दौरान आया। अदालत ने BCI के अप्रैल 2025 के प्रस्ताव को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें मिश्रा को पांच वर्ष का कार्यकाल देने की बात कही गई थी। पीठ ने कहा कि BCI अपने नियमों के तहत अध्यक्ष का कार्यकाल केवल दो वर्ष का हो सकता है, और कोई भी प्रस्ताव इस वैधानिक सीमा को निरस्त नहीं कर सकता।

नीतिगत निर्णयों पर AG और SG की निगरानी

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जब तक नया BCI गठित नहीं हो जाता, सभी नीतिगत निर्णय भारत के महान्यायवादी (Attorney General) और सॉलिसिटर जनरल (Solicitor General) के परामर्श से लिए जाएंगे। ये दोनों पदाधिकारी BCI के पदेन (ex-officio) सदस्य हैं और उनकी भागीदारी से संस्थागत जांच सुनिश्चित होगी। वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने अदालत को बताया कि मिश्रा को 2 मार्च 2025 को “सर्वसम्मति से” अध्यक्ष चुना गया था, जिसका कार्यकाल 17 अप्रैल 2025 से 16 अप्रैल 2030 तक था।

सुप्रीम कोर्ट ने BCI को पुनर्गठित करने के लिए चार-सप्ताह की समयसीमा निर्धारित की है। उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश महिला सदस्यों के सह-चयन (co-option) के लिए 2 सप्ताह का समय देंगे, जबकि राज्य बार काउंसिल अपनी अंतिम रचना को 1 सप्ताह के भीतर अधिसूचित करेंगी। नवगठित राज्य बार काउंसिलें अपने अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और BCI के लिए प्रतिनिधि का चुनाव अधिसूचना के 3 सप्ताह के भीतर करेंगी।

वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन ने ‘PEARL ट्रस्ट’ के गठन पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसके 11 प्रबंध ट्रस्टियों को “मूल एवं स्थायी ट्रस्टी” बनाया गया, जो BCI के सदस्य न रहने के बावजूद अपने पदों पर बने रहते हैं। अदालत ने BCI की वित्तीय अनियमितताओं और PEARL ट्रस्ट की जांच के निर्देश भी दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर 2026 को होगी।


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