सहरसा POCSO मामला: 6.5 माह में फैसला, दोषी को आजीवन कारावास और 50 हजार जुर्माना
बिहार के सहरसा जिले में न्यायिक सक्रियता का एक सराहनीय उदाहरण सामने आया है। सहरसा की विशेष POCSO अदालत ने एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म के मामले में अभियुक्त को आजीवन कारावास और ₹50,000 के जुर्माने की सजा सुनाई है। खास बात यह है कि यह फैसला मामला दर्ज होने के मात्र 6.5 महीने के भीतर सुनाया गया, जो त्वरित न्याय की दिशा में एक मिसाल है।
यह सजा सौरबाजार थाना कांड संख्या-52/2026 में सुनाई गई, जो 17 फरवरी 2026 को दर्ज की गई थी। अदालत ने आरोपी राज कुमार शर्मा को POCSO एक्ट की धारा 6 (नाबालिग के साथ दुष्कर्म) के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन सश्रम कारावास और 50,000 रुपये का अर्थदंड लगाया है। गौरतलब है कि धारा 6 में इस अपराध के लिए न्यूनतम 20 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक का प्रावधान है, जिसके मद्देनजर अदालत ने कड़ी सजा सुनाई।
त्वरित अनुसंधान और प्रभावी अभियोजन का परिणाम
यह फैसला सहरसा पुलिस और अभियोजन पक्ष द्वारा किए गए त्वरित अनुसंधान और प्रभावी अभियोजन का परिणाम माना जा रहा है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए साक्ष्य जुटाए और रिकॉर्ड समय में चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद अदालत ने भी तेजी से सुनवाई पूरी करते हुए दोषी को सजा सुनाई, जिससे पीड़िता के परिवार को महज 6.5 माह में न्याय मिल सका।
POCSO मामलों में त्वरित सुनवाई की मिसाल
गौरतलब है कि POCSO Act, 2012 के तहत ऐसे संवेदनशील मामलों में त्वरित सुनवाई का प्रावधान है, लेकिन वास्तविकता में यह हमेशा संभव नहीं हो पाता। सहरसा की इस अदालत और पुलिस की सक्रियता ने साबित किया है कि उचित समन्वय और गंभीरता से ऐसे मामलों में जल्द से जल्द न्याय दिलाया जा सकता है। सहरसा पुलिस ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे नाबालिगों के खिलाफ अपराधों के प्रति शून्य-सहिष्णुता की नीति का प्रतीक बताया है। पुलिस ने कहा कि वह महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों में कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है और इसी तरह की त्वरित कार्रवाई अन्य मामलों में भी जारी रहेगी।
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