नेपाल: पत्रकार किशोर श्रेष्ठ की गिरफ्तारी पर सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप, अदालत में पेश होने का आदेश
नेपाल में प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने ‘जना आस्था साप्ताहिक’ के संपादक किशोर श्रेष्ठ की गिरफ्तारी में हस्तक्षेप करते हुए उन्हें अदालत में पेश करने का आदेश दिया है। पुलिस ने उन्हें गोपनीयता अधिनियम (Privacy Act) के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया था। इस गिरफ्तारी के खिलाफ नेपाल के पत्रकार संगठनों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया है। सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश प्रेस की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मुद्दे पर एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
बता दें कि किशोर श्रेष्ठ को पुलिस ने गोपनीयता अधिनियम के उल्लंघन के आरोप में गिरफ्तार किया था। आरोप है कि उनके द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट ने किसी व्यक्ति या संस्था की निजता का उल्लंघन किया है। हालांकि, पत्रकार संगठनों का कहना है कि यह गिरफ्तारी प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला है और इसे राजनीतिक दबाव में किया गया है। पुलिस ने श्रेष्ठ को हिरासत में ले लिया था, जिसके बाद से पत्रकार संगठन सक्रिय हो गए।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप और सवाल
नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए किशोर श्रेष्ठ को अदालत में पेश करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने पुलिस और सरकार से पूछा है कि उन्हें किस आधार पर गिरफ्तार किया गया और क्या यह कार्रवाई कानूनी मानदंडों के अनुरूप है। सुप्रीम कोर्ट का यह हस्तक्षेप प्रेस की स्वतंत्रता के पक्ष में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।
पत्रकार संगठनों का विरोध
किशोर श्रेष्ठ की गिरफ्तारी के बाद नेपाल के विभिन्न पत्रकार संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किए और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की। उन्होंने इस गिरफ्तारी को ‘प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला’ करार दिया और सरकार से नाराजगी जताई। पत्रकारों का कहना है कि अगर ऐसा चलता रहा तो नेपाल में पत्रकारिता पर संकट आ जाएगा। कई पत्रकार संगठनों ने संयुक्त रूप से सरकार के इस कदम की निंदा की है।
नेपाल के सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश पत्रकार किशोर श्रेष्ठ के मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है। अब अदालत का फैसला यह तय करेगा कि क्या गिरफ्तारी कानूनी थी या यह प्रेस की स्वतंत्रता पर अनुचित हस्तक्षेप था। पत्रकार संगठनों की मांग है कि श्रेष्ठ को तुरंत रिहा किया जाए और प्रेस की स्वतंत्रता का सम्मान किया जाए। कोशी वॉइस न्यूज़ इस मामले पर नज़र बनाए रखेगा और आपको हर अपडेट से अवगत कराता रहेगा। “प्रेस की स्वतंत्रता लोकतंत्र की रीढ़ है—इसे किसी भी कीमत पर कुचला नहीं जाना चाहिए।”
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