नेपाल: पूर्व PM देउबा का ‘हिंदू कार्ड’, नेपाली कांग्रेस में वैचारिक संकट गहराया
काठमांडू, 19 अगस्त 2026 – नेपाल की राजनीति में एक बार फिर धर्म और पहचान का मुद्दा गरमा गया है। पूर्व प्रधानमंत्री एवं नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शेर बहादुर देउबा ने अपने गुट की राष्ट्रीय सभा में बार-बार “मैं हिंदू हूं” कहकर सनातन धर्म को राष्ट्रीय पहचान बनाने की वकालत की है। इस कदम ने पार्टी के भीतर पहले से मौजूद वैचारिक मतभेद को और गहरा कर दिया है, जहां दोनों गुट धर्मनिरपेक्षता बनाम हिंदू राष्ट्र की बहस में आमने-सामने हैं।
देउबा गुट की पांच-सूत्री घोषणा और विरोध
देउबा गुट के तीन दिवसीय सम्मेलन में पांच-सूत्री घोषणा पारित की गई, जिसमें सनातन धर्म को राष्ट्रीय पहचान के रूप में बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता जताई गई। घोषणा में कहा गया कि नेपाल की सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराएं राष्ट्रीय पहचान का हिस्सा हैं, और हिंदू, बौद्ध, किरात और प्राकृतिक धर्मों की रक्षा करते हुए सनातन धर्म को आगे बढ़ाया जाएगा। हालांकि, यह प्रस्ताव देउबा गुट के भीतर ही विवाद का कारण बन गया। बिमलेंद्र निधि, कृष्ण प्रसाद सितौला और प्रकाशमान सिंह जैसे वरिष्ठ नेताओं ने इसका खुलकर विरोध किया, जबकि प्रकाश शरण महत, शशांक कोइराला और शंकर भंडारी ने इसका समर्थन किया। मंच पर ही दस्तावेज को लेकर निधि और महत के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली।
राजनीतिक विश्लेषण और संवैधानिक चुनौती
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, देउबा का यह कदम पार्टी में बढ़ती राजनीतिक असुरक्षा और जनसमर्थन में गिरावट के कारण उठाया गया है। नेपाली कांग्रेस को 2026 के चुनावों में करारी हार का सामना करना पड़ा था, और पार्टी अपनी पारंपरिक जनता को बनाए रखने के लिए पहचान की राजनीति का सहारा ले रही है। विश्लेषकों का मानना है कि देउबा के लिए धर्म का मुद्दा वैचारिक प्रतिबद्धता से अधिक राजनीतिक उपजाऊ है।
यह कदम नेपाल के 2015 के संविधान को सीधी चुनौती माना जा रहा है, जो देश को धर्मनिरपेक्ष राज्य घोषित करता है। देउबा गुट का यह प्रस्ताव संवैधानिक प्रावधान को चुनौती देता है, जिससे देश में धार्मिक तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेष रूप से 26 जुलाई को सुनसरी-सिराहा में हुई सांप्रदायिक हिंसा के मद्देनजर, इस प्रस्ताव ने संवेदनशीलता को और बढ़ा दिया है। फिलहाल, पार्टी का आधिकारिक रुख स्पष्ट नहीं है, और देउबा गुट के भीतर गहरा वैचारिक विभाजन नेपाली कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।
Disclaimer
Koshi Voice News पर प्रकाशित समाचार, लेख, फोटो, वीडियो एवं अन्य सामग्री केवल सूचना के उद्देश्य से प्रकाशित की जाती है। समाचार सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक एवं विश्वसनीय स्रोतों, बिहार सरकार, बिहार पुलिस, सरकारी विभागों, प्रेस विज्ञप्तियों तथा अन्य मान्यता प्राप्त स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर प्रकाशित किए जाते हैं। कुछ तस्वीरें एवं ग्राफिक्स AI-Generated या सांकेतिक हो सकते हैं। जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि करना उचित होगा।
Grievance Officer: शिकायत, सुझाव या आपत्ति के लिए ईमेल: ceo@koshivoice.in | WhatsApp: +91 92790 09245


