NALSAR स्टूडेंट काउंसिल ने BCI के पत्र की निंदा की, बोली- CJI भी जांच से ऊपर नहीं
हैदराबाद, 15 अगस्त 2026 – NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ़ लॉ की स्टूडेंट बार काउंसिल ने बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के उस पत्र की कड़ी निंदा की है, जिसमें 2026 बैच के ग्रेजुएट्स के एनरोलमेंट पर रोक लगाने की बात कही गई थी। यह कार्रवाई उन छात्रों के खिलाफ की गई, जिन्होंने दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर CJI सूर्य कांत को बुलाए जाने का विरोध किया था। स्टूडेंट काउंसिल ने इसे “लोकतांत्रिक असहमति” को दबाने की कोशिश बताया है।
स्टूडेंट बॉडी के अनुसार, BCI प्रमुख का पत्र उनके कानूनी दायरे से बाहर है और यह कदम “उनके पद के अनुकूल नहीं” है। बयान में कहा गया कि CJI को बुलाए जाने के विरोध में शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाने वाले छात्रों की पहचान उजागर करने की कोशिश “प्राइवेसी का दखलपूर्ण उल्लंघन” है। पत्र में कैंपेन से जुड़े हर व्यक्ति – चाहे वह आयोजक हो, समन्वयक हो, सोशल मीडिया एडमिन हो या फिर फैकल्टी मेंबर – की निगरानी की बात कही गई थी, जिसे छात्रों ने “डराने-धमकाने की रणनीति” करार दिया।
BCI के शब्दों पर आपत्ति और असहमति का अधिकार
स्टूडेंट काउंसिल ने BCI द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा पर भी आपत्ति जताई, जिसमें यूनिवर्सिटी में “गुटबाजी”, “गंदी राजनीति” और फैकल्टी द्वारा छात्रों को “गुमराह करने और भड़काने” जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया। छात्रों का कहना है कि यह “राष्ट्र-विरोधी” नैरेटिव को दर्शाता है, जो असहमति को उसकी खूबियों पर नहीं बल्कि “बाहरी ताकतों” के हिस्से के रूप में खारिज करता है। बयान में साफ कहा गया कि छात्र अपने राजनीतिक विचारों के खुद मालिक हैं और उन्हें “भड़काने” वाला बताना उनकी बौद्धिक क्षमता का अपमान है।
हालांकि BCI ने एनरोलमेंट पर रोक लगाने वाला पत्र बाद में वापस ले लिया, लेकिन स्टूडेंट काउंसिल ने इसे पर्याप्त नहीं माना। उन्होंने BCI चेयरमैन से आपत्तिजनक टिप्पणियों के लिए माफी की मांग की और कहा कि मौजूदा चेयरमैन राज्यसभा सदस्य होने के नाते अपनी राजनीतिक पहचान से अलग होकर काम नहीं कर रहे हैं। बयान में कहा गया कि असहमति के पीछे “बाहरी लोगों” को तलाशने की कोशिश पुरानी और खतरनाक है, क्योंकि यह छात्रों की आवाज को दबाने का काम करती है।
न्यायिक जवाबदेही की जरूरत
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर जारी इस बयान में स्टूडेंट काउंसिल ने स्पष्ट किया कि “संवैधानिक लोकतंत्र में कोई भी संस्था, जिसमें सुप्रीम कोर्ट और CJI भी शामिल हैं, जायज़ जांच-पड़ताल से ऊपर नहीं है।” उन्होंने कहा कि न्यायिक जवाबदेही, न्यायिक स्वतंत्रता के खिलाफ नहीं बल्कि उसकी रक्षा के लिए जरूरी है। बयान में जावेद अहमद हजाम, अनीता ठाकुर और मज़दूर किसान शक्ति संगठन जैसे मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि असहमति के अधिकार को दबाना नहीं बल्कि संरक्षित करना चाहिए। NALSAR स्टूडेंट काउंसिल ने कहा कि यूनिवर्सिटीज़ राज्य का विस्तार नहीं हैं और रेगुलेटर राजनीतिक राय पर पुलिसिंग करने का साधन नहीं हो सकते।
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