पिघलते ग्लेशियर से बाहर आए दशकों पुराने पर्वतारोहियों के शव
ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन का गंभीर असर; यालुंग री और एवरेस्ट के पास बर्फ पिघलने से मिले मानव अवशेष
📍 काठमांडू (नेपाल)
जलवायु परिवर्तन और लगातार बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण हिमालयी क्षेत्रों के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। बर्फ की चादर हटने से दशकों पुराने दर्दनाक हादसे और लापता पर्वतारोहियों के शव बाहर आ रहे हैं। हाल ही में नेपाल के पूर्वी हिमालय में स्थित यालुंग री (Yalung Ri) बेस कैंप में 5,630 मीटर की ऊंचाई पर बर्फ पिघलने से पांच पर्वतारोहियों के अवशेष मिले हैं।
इससे पहले अप्रैल में एवरेस्ट के खुम्बू आइसफॉल क्षेत्र से भी कई मानव अवशेष बरामद किए गए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि 2000 के बाद से हिंदू कुश हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर दो दोगुनी रफ्तार से पिघल रहे हैं।
🏔️ बढ़ती चुनौतियां: पिघलती बर्फ से न केवल पुराने दबे हुए शव बाहर निकल रहे हैं, बल्कि पर्वतारोहण के पारंपरिक ट्रैकिंग रूट भी अत्यधिक खतरनाक और अस्थिर होते जा रहे हैं।
⚠️ नेपाल सरकार के लिए शवों की बरामदगी बना जटिल काम
अत्यधिक ऊंचाई और कठिन मौसम के बीच शवों की पहचान करना और उन्हें सुरक्षित नीचे लाना नेपाल सरकार तथा सेना के लिए बेहद खर्चीली और जानलेवा चुनौती बन गया है। केवल 2024 में ही एवरेस्ट से 4 शव और कंकाल बरामद किए गए थे।
🚨 जलवायु संकट का स्पष्ट संदेश
हिमालय में लगातार हो रहे हिमस्खलन और ग्लेशियरों का पिघलना पर्यावरण संकट की गंभीर घंटी बजा रहा है। वैज्ञानिकों की चेतावनी है कि यदि तापमान इसी दर से बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में और भी पुराने अवशेष सामने आ सकते हैं।


