फ्यूचर ग्रुप के किशोर बियानी को बॉम्बे हाई कोर्ट से बड़ी राहत, बैंक ऑफ इंडिया का ‘फ्रॉड’ टैग रद्द

मुंबई, महाराष्ट्र तारीख: 10 जुलाई 2026 | समय: सुबह 04:11 बजे

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में फ्यूचर लाइफस्टाइल फैशंस लिमिटेड (FLFL) के प्रमोटर किशोर बियानी और राकेश बियानी को बहुत बड़ी कानूनी राहत दी है। अदालत ने बैंक ऑफ इंडिया द्वारा इन दोनों प्रमोटरों के खातों को ‘फ्रॉड’ (धोखाधड़ी) घोषित करने के फैसले को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। अदालत के इस आदेश से बियानी बंधुओं को बड़ी व्यावसायिक और व्यक्तिगत राहत मिली है।

इस मामले की सुनवाई बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति बी.पी. कोलाबावाला और न्यायमूर्ति फिरदौस पी. पूनीवाला की खंडपीठ ने की। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट तौर पर कहा कि बैंक ऑफ इंडिया का यह आदेश बिना किसी ठोस कारण के जारी किया गया था। अदालत ने पाया कि बैंक की यह कार्रवाई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के वर्ष 2024 के ‘फ्रॉड मास्टर डायरेक्शंस’ (धोखाधड़ी जोखिम प्रबंधन नियमों) का सीधा उल्लंघन है।

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बियानी बंधुओं ने बैंक ऑफ इंडिया द्वारा 21 जून 2025 को जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उनकी कंपनी और उनके व्यक्तिगत नामों को फ्रॉड श्रेणी में डाल दिया गया था। प्रमोटरों के वकीलों ने दलील दी थी कि कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर द्वारा बैंक के कारण बताओ नोटिस का एक विस्तृत जवाब सौंपा गया था। इसके बावजूद बैंक ने उस जवाब पर विचार किए बिना केवल फॉरेंसिक ऑडिट रिपोर्ट के कुछ हिस्सों को कॉपी-पेस्ट करके सीधे फ्रॉड का निष्कर्ष निकाल लिया।

हाई कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि आरबीआई के नियमों के तहत जब भी किसी खाते को फ्रॉड घोषित किया जाता है, तो बैंक के लिए एक तार्किक और स्पष्ट आदेश जारी करना अनिवार्य होता है। कोर्ट ने पाया कि बैंक का आदेश पूरी तरह से बिना सोचे-समझे और बिना किसी ठोस वजह के जारी किया गया था, जो आरबीआई के कानूनी ढांचे के खिलाफ है।

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अदालत ने अपने आदेश में बैंक ऑफ इंडिया को सख्त निर्देश दिया है कि वह सुनिश्चित करे कि सेंट्रल फ्रॉड रजिस्ट्री में किशोर बियानी और राकेश बियानी का नाम ‘फ्रॉड’ के रूप में दर्ज न रहे। हालांकि, कोर्ट ने यह भी साफ किया कि यदि बैंक चाहे तो आरबीआई के 2024 के नियमों का पूरी तरह पालन करते हुए इस मामले में नए सिरे से कानूनी प्रक्रिया शुरू करने के लिए स्वतंत्र है।

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यह समाचार प्रतिष्ठित कानूनी समाचार पोर्टल ‘बार एंड बेंच’ (Credit: Bar & Bench) द्वारा प्रकाशित अदालती विवरणों पर आधारित है। इस कॉर्पोरेट बैंकिंग मामले, आरबीआई के नियमों और अंतिम अदालती शर्तों की पूर्ण एवं प्रामाणिक जानकारी के ú कृपया बॉम्बे हाई कोर्ट द्वारा जारी किए गए आधिकारिक विस्तृत आदेश पत्र (Order Copy) का ही संदर्भ लें।

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