Who is Nandan Nilekani Appointed National Exam Reforms: कौन हैं नंदन नीलेकणि? जिन्हें PM मोदी ने सौंपी परीक्षा सुधार की कमान

🎓 नीट पेपर लीक के बाद बड़ा एक्शन: इंफोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि को मिली राष्ट्रीय परीक्षा सुधारों की कमान

🎓 नई दिल्ली: NEET पेपर लीक और राष्ट्रीय परीक्षाओं में धांधली के गंभीर मुद्दों के बीच केंद्र सरकार ने देश की परीक्षा प्रणाली को फुलप्रूफ और पारदर्शी बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंफोसिस के सह-संस्थापक और आईटी दिग्गज नंदन नीलेकणि को राष्ट्रीय परीक्षा सुधार (National Exam Reforms) समिति की कमान सौंपी है।

💡 नंदन नीलेकणि देश में डिजिटल क्रांति और टेक-इन्फ्रास्ट्रक्चर के बड़े शिल्पकार माने जाते हैं। भारत के आधार (Aadhaar) प्रोजेक्ट के शुरुआती दिनों में UIDAI के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने पूरे देश का डिजिटल पहचान ढांचा खड़ा किया था। इसके अलावा UPI और डिजिटल इंडिया मिशन में भी उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही है।

📢 मुख्य बिंदु (Key Highlights)
  • 👉 बड़ी जिम्मेदारी: NEET विवाद के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली और परीक्षा तंत्र को आधुनिक बनाने का काम।
  • 💻 डिजिटल मास्टरमाइंड: भारत के आधार कार्ड प्रोजेक्ट और UPI इकोसिस्टम के प्रमुख सूत्रधार हैं नीलेकणि।
  • 🛡️ फुलप्रूफ सिस्टम: लीक-प्रूफ ऑनलाइन परीक्षा ढांचा, AI आधारित निगरानी और साइबर सुरक्षा मजबूत करने पर रहेगा जोर।

🛡️ परीक्षा तंत्र में होगा तकनीकी बदलाव: नंदन नीलेकणि के नेतृत्व में बनी यह विशेष पैनल नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की कमियों की समीक्षा करेगी। इसमें टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर पेपर लीक रोकने, पारदर्शी डेटा ट्रांसफर और परीक्षा केंद्रों की AI आधारित रियल-टाइम मॉनिटरिंग का मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा ताकि भविष्य में किसी भी परीक्षा में धांधली न हो सके।

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👥 लाखों छात्रों को राहत की उम्मीद: हर साल देश भर के करोड़ों छात्र NEET, JEE, CUET जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। परीक्षा लीक के कारण छात्रों को होने वाली मानसिक परेशानी और अनिश्चितता को दूर करने के लिए सरकार ने नीलेकणि जैसे अनुभवी टेक लीडर को यह जिम्मेदारी सौंपी है।

🎯 Koshi Voice की नज़र: जिस तरह नंदन नीलेकणि ने देश को एक पारदर्शी डिजिटल पहचान प्रणाली दी, उसी तर्ज पर अब राष्ट्रीय परीक्षाओं में अभेद्य तकनीक का लागू होना समय की मांग है। इस सुधार से देश के दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों के प्रतिभाशाली छात्रों का निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली पर भरोसा फिर से बहाल होगा।
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Koshi Voice News Desk

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