
भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू होने के 2 साल पूरे हो गए हैं। अमित शाह ने इसे देश का सबसे बड़ा कानूनी सुधार बताया। जानिए e-FIR, Zero FIR समेत भारतीय न्याय संहिता के 5 बड़े बदलाव और नए कानून का आम जनता पर असर।
1 जुलाई 2024 को देश में अंग्रेजों के जमाने की भारतीय दंड संहिता (IPC) को हटाकर लागू की गई ‘भारतीय न्याय संहिता’ (BNS) के अब दो वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बयान देते हुए कहा कि BNS केवल धाराओं में बदलाव नहीं, बल्कि देश की न्याय प्रणाली को ‘दण्ड केंद्रित’ से बदलकर ‘न्याय केंद्रित’ बनाने की एक ऐतिहासिक पहल है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नए कानूनों से नागरिकों को त्वरित, पारदर्शी और डिजिटल न्याय मिल रहा है, जिससे पुलिसिंग की पूरी दिशा बदल गई है।
BNS के लागू होने से पहला सबसे बड़ा जमीनी बदलाव e-FIR के रूप में सामने आया है, जिससे अब नागरिकों को छोटी-मोटी शिकायतों के लिए बार-बार थाने के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। लोग CCTNS पोर्टल के जरिए ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं, जिसके बाद 3 दिनों के भीतर थाने जाकर हस्ताक्षर करना होता है। दूसरा बड़ा सुधार Zero FIR का है, जिसके तहत अपराध किसी भी क्षेत्र में हुआ हो, पीड़ित किसी भी नजदीकी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज करा सकता है, जिसे बाद में संबंधित थाने में ट्रांसफर कर दिया जाता है।

तीसरा मुख्य बदलाव जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और आधुनिकता को लेकर है, जहाँ 7 साल से अधिक की सजा वाले गंभीर मामलों में घटनास्थल की फॉरेंसिक जांच और वीडियोग्राफी को अनिवार्य कर दिया गया है। चौथा बदलाव महिलाओं और कमजोर वर्गों की सुरक्षा से जुड़ा है, जिसके तहत पीड़िता के बयान महिला अधिकारी द्वारा ही दर्ज किए जाने और आवश्यकता पड़ने पर घर पर ही बयान लेने का प्रावधान है।
पांचवां और सबसे सख्त प्रावधान नशे में किए गए अपराधों पर नियंत्रण के लिए जोड़ा गया है। नए नियमों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से नशा करके हत्या या मारपीट जैसा गंभीर अपराध करता है, तो नशा बचाव का आधार नहीं बनेगा, बल्कि ऐसे मामलों में सजा डेढ़ गुना और जुर्माना दोगुना तक बढ़ाने का प्रावधान है। गृह मंत्री के अनुसार, यद्यपि जमीनी स्तर पर ट्रेनिंग और तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर की चुनौतियां हैं, लेकिन BNS से भारत का आपराधिक न्याय तंत्र दुनिया में सबसे आधुनिक बन रहा है।
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