
महंगाई और आर्थिक वृद्धि में संतुलन बनाने की कोशिश; कच्चे तेल की कीमतों में अनिश्चितता के बीच केंद्रीय बैंक का बड़ा फैसला
📍 मुंबई / नई दिल्ली
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई दर की स्थिति की समीक्षा करते हुए एक बार फिर रेपो रेट (Repo Rate) में कोई बदलाव न करने का अहम फैसला लिया है। अगस्त 2026 की समीक्षा के तहत रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही बरकरार रखा गया है।
विशेषज्ञों और रॉयटर्स पोल के अनुसार, केंद्रीय बैंक का यह निर्णय कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक तनाव और आर्थिक विकास दर (Growth Rate) की सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया गया है।
“भारत अपनी 90% कच्चे तेल की जरूरतें आयात करता है। जून में खुदरा महंगाई 4.38% दर्ज होने के बावजूद RBI ने रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखकर आर्थिक गतिविधियों को गति देने का निर्णय लिया है।”
🏦 आम जनता, किसानों और कारोबारियों पर असर
रेपो रेट स्थिर रहने से बैंक लोन (Home Loan, Auto Loan, Personal Loan) की मासिक किस्तों (EMI) में तुरंत बढ़ोतरी नहीं होगी। सीमांचल और बिहार के छोटे व्यापारियों और किसानों के लिए यह राहत की बात है क्योंकि ब्याज दरें न बढ़ने से कर्ज चुकाने का अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं बढ़ेगा।
📈 विकास दर (Growth) पर फोकस
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि RBI इस समय ब्याज दरों में बढ़ोतरी करता, तो बाजार में लिक्विडिटी (नकदी प्रवाह) प्रभावित हो सकती थी। वर्तमान फैसले से घरेलू बाजार में मांग बनी रहेगी और देश की आर्थिक विकास दर को मजबूती मिलेगी।



