
नई दिल्ली स्थित संसद भवन में NEET पेपर लीक मामले को लेकर गतिरोध तेज हो गया है। PM मोदी ने मामले की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा की है, जबकि विपक्ष ने इसे अपर्याप्त करार देते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की है।
राजधानी नई दिल्ली स्थित संसद भवन में NEET पेपर लीक मामले को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। संसद सत्र के दौरान देश के लाखों अभ्यर्थियों से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर भारी हंगामा देखने को मिला। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि इस आपराधिक कृत्य में शामिल सभी दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए सरकार विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करने जा रही है।
प्रधानमंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से मामले की समयबद्ध और त्वरित सुनवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और युवाओं के भरोसे को पुनर्स्थापित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हालांकि, प्रधानमंत्री के इस आश्वासन के बावजूद विपक्षी दलों का गुस्सा शांत नहीं हुआ।
विपक्ष ने प्रधानमंत्री द्वारा फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाने के ऐलान को अपर्याप्त और लीपापोती करार दिया है। विपक्षी सांसदों ने संसद के भीतर जोरदार नारेबाजी करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे की मांग पकड़ ली है। विपक्ष का तर्क है कि जब तक शीर्ष स्तर पर नैतिक जिम्मेदारी तय नहीं की जाती और पूरी प्रणाली में सुधार नहीं होता, तब तक निष्पक्ष जांच संभव नहीं है।
हंगामे के चलते संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। विपक्ष इस मुद्दे पर व्यापक बहस कराने और पूरे मामले की स्वतंत्र जांच समिति से पड़ताल कराने पर अड़ा हुआ है। वहीं, सत्ता पक्ष की ओर से मंत्रियों ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार जांच एजेंसियों के साथ मिलकर पारदर्शी कार्रवाई कर रही है और विपक्ष इस गंभीर विषय पर केवल राजनीति करने का काम कर रहा है।
NEET परीक्षा में हुई कथित गड़बड़ी और पेपर लीक का यह मामला अब सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक रूप ले चुका है। एक तरफ जहां सरकार कानूनी प्रक्रियाओं को तेज करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ छात्रों और अभिभावकों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि उन्हें कब तक वास्तविक न्याय और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था मिल पाती है।
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