दहेज में भैंस न मिलने पर पत्नी की हत्या: पश्चिम चंपारण कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, पति को उम्रकैद
पश्चिम चंपारण जिले की बगहा अदालत ने छह साल पुराने एक संवेदनशील दहेज हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने दहेज में भैंस और मोटरसाइकिल की मांग पूरी न होने पर पत्नी की हत्या करने वाले पति सुभाष यादव को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह फैसला दहेज प्रथा के खिलाफ एक सख्त संदेश माना जा रहा है।
2020 का दहेज हत्याकांड और अदालती कार्रवाई
घटना 2020 की है, जब आरोपी सुभाष यादव ने दहेज के लिए भैंस और मोटरसाइकिल की मांग को लेकर अपनी पत्नी रीना देवी की हत्या कर दी थी। हत्या के बाद आरोपी ने शव को जलाकर तीन टुकड़ों में काटकर अलग-अलग बोरियों में फेंक दिया था। रीना की मां मंजू देवी की शिकायत पर 30 जुलाई 2020 को धनहा थाने में मामला दर्ज किया गया था।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मनवेंद्र मिश्रा की अदालत ने मुकदमे की सुनवाई के दौरान सभी गवाहों के बयान और जांच में जुटाए गए सबूतों को आधार बनाया। सरकारी वकील मन्नू राव ने अदालत को बताया कि दंपति के बीच दहेज को लेकर लगातार विवाद चल रहा था। सभी गवाहों ने अभियोजन पक्ष का समर्थन किया, जिसके आधार पर अदालत ने सुभाष यादव को दोषी ठहराया।
सजा का विवरण और बच्चों के लिए सहायता राशि
अदालत ने IPC की धारा 302 (हत्या) के तहत आजीवन कारावास और ₹1 लाख जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न देने पर उसे 6 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। वहीं, धारा 201 (सबूत मिटाना) में 7 साल की सजा और ₹25,000 जुर्माना लगाया गया, जिसे न चुकाने पर 6 महीने की अतिरिक्त सजा होगी।
अपने फैसले में अदालत ने दंपति के दो नाबालिग बच्चों के भविष्य का भी ध्यान रखा। चूंकि मां की मृत्यु हो गई है और पिता आजीवन कारावास की सजा काटेंगे, इसलिए बच्चों की परवरिश के लिए अदालत ने बिहार सरकार को प्रति बच्चा ₹4,000 प्रति माह की सहायता राशि देने का निर्देश दिया। यह फैसला दहेज प्रथा के खिलाफ एक मिसाल है और न्याय प्रणाली की संवेदनशीलता को भी दिखाता है।
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