
मिडिल ईस्ट वॉर में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ घातक सी ड्रोन्स (Unmanned Sea Vehicles) तैनात किए हैं। जानिए इन समुद्री ड्रोन्स की रेंज, पेलोड, स्पीड और कीमत।
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मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में जारी भीषण सैन्य संघर्ष के बीच एक बेहद चौंकाने वाली और आधुनिक तकनीक से लैस युद्ध नीति सामने आई है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के दौरान अमेरिकी नौसेना ने पानी के रास्ते ईरान की घेराबंदी करने के लिए अपने सबसे आधुनिक और घातक ‘सी ड्रोन्स’ यानी मानवरहित समुद्री वाहनों (Unmanned Sea Vehicles – USV) को मोर्चे पर उतार दिया है। रणनीतिक सूत्रों के अनुसार, ग्लोबल ऑटोनॉमस रीकॉनिसेंस क्राफ्ट (GARC) और अन्य रोबोटिक युद्धक जहाजों ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और ओमान की खाड़ी में कई सौ घंटों से अधिक का ऑपरेशनल समय पूरा कर लिया है, जो नौसैनिक इतिहास में इस तरह की तकनीक का पहला बड़ा आक्रामक इस्तेमाल माना जा रहा है।
सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, इन आधुनिक सी ड्रोन्स को बेड़े में शामिल करने के पीछे अमेरिका का मुख्य उद्देश्य बिना किसी मानवीय नुकसान के ईरानी नौसेना की गतिविधियों पर पैनी नजर रखना और जरूरत पड़ने पर उनके युद्धक जहाजों और बारूदी सुरंगों (Sea Mines) को नष्ट करना है। ये सी ड्रोन्स पूरी तरह से स्वायत्त (Autonomous) या रिमोट कंट्रोल से संचालित होते हैं। यह तकनीक यूक्रेन-रूस युद्ध में ब्लैक सी (काला सागर) के भीतर आज़माई जा चुकी है, लेकिन मिडिल ईस्ट के इस महायुद्ध में अमेरिका ने इसके कहीं अधिक उन्नत और जानलेवा संस्करणों को तैनात किया है, जो भारी मात्रा में विस्फोटक ले जाने और दुश्मन के रडार को चकमा देने में सक्षम हैं।
अगर इन मानवरहित युद्धक जहाजों की परिचालन क्षमताओं और विशिष्टताओं (Specifications) की बात करें, तो घटनाक्रम के अनुसार इनका विवरण निम्नलिखित है:
पेलोड और मारक क्षमता: ये सी ड्रोन्स सैकड़ों किलोग्राम उच्च क्षमता वाले विस्फोटक, अत्याधुनिक कैमरे, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग उपकरण ले जाने में सक्षम हैं। कुछ बड़े ड्रोन्स को आत्मघाती हमलों के लिए भी डिजाइन किया गया है, जो सीधे दुश्मन के जहाजों से टकराकर उन्हें जलसमाधि दे सकते हैं।
स्पीड और रेंज: आधुनिक नौसैनिक सी ड्रोन्स 40 से 50 नॉट (लगभग 75-90 किमी प्रति घंटा) की तेज रफ्तार से पानी की सतह पर दौड़ सकते हैं। इनकी परिचालन रेंज सैकड़ों समुद्री मील तक फैली हुई है, जिससे ये लंबी दूरी के मिशनों को बिना रुके अंजाम दे सकते हैं।
लागत और निर्माण : पारंपरिक नौसैनिक युद्धपोतों की तुलना में इन सी ड्रोन्स की कीमत बेहद कम होती है। जहां एक बड़े फाइटर शिप को बनाने में अरबों डॉलर खर्च होते हैं, वहीं ये सी ड्रोन्स कुछ लाख डॉलर में तैयार हो जाते हैं। कम लागत होने के कारण इन्हें नष्ट होने पर आसानी से बदला जा सकता है।
पेंटागन और अमेरिकी नौसेना के रणनीतिकारों का मानना है कि ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में बिछाई गई बारूदी सुरंगों और उसकी कुख्यात ‘स्पीड बोट्स’ आक्रामक नीति का मुकाबला करने के लिए यह तकनीक सबसे सटीक हथियार है। इस बीच, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने भी अमेरिकी ऑटोनॉमस जहाजों की सक्रियता पर कड़ी आपत्ति जताई है और क्षेत्र में किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। मिडिल ईस्ट में सी ड्रोन्स की यह भारी तैनाती यह साफ करती है कि आने वाले समय में पारंपरिक नौसैनिक युद्ध पूरी तरह से रोबोटिक और मानवरहित तकनीकों में तब्दील होने वाला है।
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