
विवाह, तलाक, संपत्ति और गोद लेने के लिए बनेगा एक समान कानून; पूर्वोत्तर राज्यों में विरोध प्रदर्शन शुरू, 4 अगस्त को हो सकती है वोटिंग
📍 नई दिल्ली
देश के संसदीय इतिहास में आज का दिन ऐतिहासिक दर्ज हो गया, जब केंद्रीय कानून मंत्री ने लोकसभा में बहुप्रतीक्षित ‘समान नागरिक संहिता’ (Uniform Civil Code – UCC) विधेयक, 2026 को पेश किया। इस कानून का मुख्य उद्देश्य धर्म, जाति और लिंग से परे जाकर देश के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, विरासत, संपत्ति अधिकार और गोद लेने से जुड़े एक समान वैधानिक प्रावधान लागू करना है।
विधेयक के पेश होते ही निचले सदन में सत्तापक्ष और विपक्षी सांसदों के बीच जोरदार हंगामा देखने को मिला। जहां एक ओर सरकार ने इसे संविधान के अनुच्छेद 44 (राज्य के नीति निदेशक तत्व) को पूरा करने और ‘महिला सशक्तिकरण’ (Women Empowerment) की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने इसे विविधता पर हमला करार दिया।
“एक देश, एक कानून से ही समाज में वास्तविक बराबरी और लैंगिक न्याय लाया जा सकता है। यह विधेयक महिलाओं के अधिकारों को मजबूती देगा।” — केंद्रीय कानून मंत्री
विपक्ष की JPC की मांग और पूर्वोत्तर में विरोध के स्वर
INDIA गठबंधन के घटक दलों ने मांग की है कि इस संवेदनशील बिल को तुरंत पारित करने के बजाय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजा जाए, ताकि सभी धर्मों और समुदायों से व्यापक विचार-विमर्श किया जा सके।
दूसरी ओर, पूर्वोत्तर राज्यों (विशेष रूप से नागालैंड और मिजोरम) के आदिवासी संगठनों और ईसाई समुदायों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। उनका तर्क है कि यह कानून उनकी पारंपरिक, सांस्कृतिक और संवैधानिक स्वायत्तता में हस्तक्षेप करता है।
4 अगस्त को वोटिंग की संभावना, संसद में 4 दिन की बहस
लोकसभा स्पीकर ने इस ऐतिहासिक विधेयक पर विस्तृत चर्चा के लिए 4 दिनों का समय तय किया है। सूत्रों के अनुसार, बहस पूरी होने के बाद 4 अगस्त को इस पर वोटिंग कराई जा सकती है। उत्तराखंड और असम जैसे राज्यों द्वारा स्थानीय स्तर पर पहल के बाद अब केंद्र सरकार पूरे देश में इसे लागू करने के लिए पूरी तरह गंभीर नजर आ रही है।



