
मशहूर कॉलर आईडी ऐप ट्रूकॉलर (Truecaller) ने टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) की कॉलर आईडी पॉलिसी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कंपनी का दावा है कि ट्राई के नए नियमों के कारण देश में स्पैम और स्कैम कॉल्स की बाढ़ आ गई है, जिससे सीधे तौर पर जालसाजों को फायदा पहुंच रहा
नई दिल्ली से आ रही इस बड़ी आर्थिक व तकनीकी खबर को बुधवार, 8 जुलाई 2026 को रात 8:22 बजे अपडेट किया गया है। ट्रूकॉलर का यह आधिकारिक बयान ट्राई के साथ चल रहे नियामकीय विवाद के बीच आज 9 जुलाई 2026 को पूरे टेक जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है।
ट्रूकॉलर के मुताबिक, ट्राई द्वारा 140 और 1600 सीरीज़ के कमर्शियल नंबरों को ‘व्हाइटलिस्ट’ करने और उन पर ‘कम्युनिटी स्पैम वॉर्निंग’ (Spam Warning) दिखाने पर रोक लगाने के बाद से स्पैम कॉल्स में अप्रत्याशित रूप से भारी बढ़ोतरी देखी गई है। कंपनी का कहना है कि जब से इन नंबरों पर स्पैम की चेतावनी दिखना बंद हुई है, तब से उपभोक्ताओं का कॉलर आईडी सिस्टम पर भरोसा कमजोर हुआ है। इसका सबसे सीधा फायदा वित्तीय धोखाधड़ी और स्कैम करने वाले अपराधियों को मिल रहा है, जो इन सीरीज़ के नंबरों की आड़ में आम लोगों को निशाना बना रहे हैं।
इसके साथ ही, ट्रूकॉलर ने उन मीडिया रिपोर्ट्स का भी पूरी तरह से खंडन किया है जिनमें दावा किया गया था कि ट्राई अब कॉलर आईडी ऐप्स को अपने दायरे में लेकर उन पर सीधे तौर पर निगरानी या रेगुलेट करने के लिए नए और विशेष अधिकार मांग रहा है। कंपनी ने साफ शब्दों में कहा कि इस तरह की खबरें और दावे पूरी तरह से बेबुनियाद व गलत हैं। ट्रूकॉलर ने साफ किया कि कॉलर आईडी ऐप्स पर किसी भी तरह का अनुचित रेगुलेशन या पाबंदी उपभोक्ताओं की सुरक्षा को और ज्यादा खतरे में डाल सकती है।
डिस्क्लेमर: यह खबर विभिन्न मीडिया नेटवर्क्स और आधिकारिक आर्थिक व तकनीकी स्रोतों से प्राप्त जानकारियों पर आधारित है। कोशी वाज़ इसकी सत्यता की पुष्टि अपने स्तर पर स्थापित नियमों के तहत करता है। किसी भी शिकायत या आपत्ति के लिए हमारे शिकायत पोर्टल या आधिकारिक ईमेल आईडी ceo@koshivaz.in पर संपर्क कर सकते हैं।
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