
राज्यसभा ने ध्वनिमत से पास किया सुप्रीम कोर्ट संशोधन बिल 2026; 2019 के बाद पहली बार बढ़ी जजों की संख्या
📍 नई दिल्ली | संसद भवन
भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लेते हुए संसद ने बुधवार (5 अगस्त) को सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। राज्यसभा से ध्वनिमत (Voice Vote) द्वारा पारित होने के बाद अब सर्वोच्च अदालत में स्वीकृत न्यायाधीशों की कुल संख्या 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी।
लोकसभा पहले ही इस विधेयक को मंजूरी दे चुकी थी। यह संशोधन मई 2026 में जारी अध्यादेश (Ordinance) की जगह लेगा और राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के साथ ही आधिकारिक रूप से कानून का रूप ले लेगा।
⚖️ नया ढांचा: सीजेआई (CJI) को छोड़कर जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की गई है। मुख्य न्यायाधीश सहित अब शीर्ष अदालत की कुल संख्या 38 होगी।
🏛️ क्यों पड़ी जजों की संख्या बढ़ाने की जरूरत?
केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सदन में विधेयक पेश करते हुए कहा कि जजों की संख्या में बढ़ोतरी से सुप्रीम कोर्ट में मुकदमों के लंबित रहने (Case Pendency) की समस्या दूर होगी। इससे अदालत में संविधान पीठों और नियमित मामलों की एक साथ तेजी से सुनवाई हो सकेगी।
🤝 न्यायिक सुदृढ़ीकरण की दिशा में बड़ा कदम
चर्चा के दौरान जहां विपक्ष ने वॉकआउट किया, वहीं अन्य दलों ने बिल का समर्थन किया। बीजेडी सांसद शश्मित पात्रा ने कहा कि “जब सुप्रीम कोर्ट मजबूत होता है, तो संविधान सुरक्षित रहता है।” यह ऐतिहासिक कानून आम नागरिकों को त्वरित और सुलभ न्याय दिलाने में गेमचेंजर साबित होगा।

