रांची में JPSC-JSSC आंदोलन के 19वें दिन रात में कटी बिजली, सियासत गर्म
#JharkhandStudentProtest: CBI जांच की मांग पर अड़े अभ्यर्थी; देर रात प्रदर्शन स्थल की बत्ती गुल होने पर प्रशासन पर डराने का आरोप, विपक्ष का करारा हमला
📍 रांची (झारखंड) | विशेष ग्राउंड रिपोर्ट
झारखंड राज्य लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हुई कथित धांधली व अनियमितताओं को लेकर राजधानी रांची में छात्रों का अनिश्चितकालीन आंदोलन बुधवार को 19वें दिन में प्रवेश कर गया। प्रदर्शनकारी छात्र परीक्षा रद्द करने, निष्पक्ष सीबीआई (CBI) जांच कराने और धांधली के दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग पर डटे हुए हैं।
JPSC-JSSC परीक्षाओं की CBI जांच, विवादित परीक्षाओं को रद्द करना व दोषी अधिकारियों पर सख्त एक्शन।
इस बीच, देर रात प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई ने विवाद को और गहरा कर दिया है। छात्र नेताओं का आरोप है कि रात करीब 11 बजे उपायुक्त (DC) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) की मौजूदगी में जेपीएससी कार्यालय के पास धरना स्थल की बिजली आपूर्ति अचानक काट दी गई और पुलिस बल द्वारा छात्रों को स्थल से हटाने का अनुचित दबाव बनाया गया।
छात्रों का कहना है कि यह रात के अंधेरे में उन्हें डराने और आंदोलन को कुचलने की प्रशासनिक रणनीति है। हालांकि, जिला प्रशासन ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि यह सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने की नियमित प्रक्रिया का हिस्सा था, और किसी भी छात्र पर अनुचित दबाव नहीं बनाया गया।
🏛️ सत्ता और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज
घटनाक्रम के बाद झारखंड की राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस कदम को “लोकतंत्र का हनन” बताते हुए आरोप लगाया कि हेमंत सोरेन सरकार युवाओं और छात्रों की जायज आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है। वहीं, विपक्षी नेताओं ने ट्वीट कर सरकार से छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान करने और तुरंत संवाद के जरिए हल निकालने की वकालत की है।
“बातचीत से समाधान निकालने को तैयार है सरकार; विपक्ष छात्रों के मुद्दे पर राजनीति कर रहा है।”
दूसरी ओर, राज्य सरकार के मंत्रियों ने पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष इस छात्र आंदोलन को राजनीतिक रूप से भुनाने और राज्य में अस्थिरता पैदा करने का प्रयास कर रहा है। सरकार का दावा है कि वह छात्रों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और प्रतिनिधिमंडल के साथ वार्ता के कई दौर पूरे किए जा चुके हैं।
19 दिनों से जारी यह सत्याग्रह अब पूरे राज्य में चर्चा का केंद्र बन चुका है। बत्ती काटने के इस वाकये के बाद आंदोलनकारियों का हौसला और आक्रामक रुख देखने को मिल रहा है। सभी की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार युवाओं की मांगों पर कोई ठोस निर्णय लेती है या गतिरोध और लंबा खींचता है।


