डिजिटल फ्रॉड और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे साइबर अपराधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 29 अक्टूबर 2026 को अहम टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि यदि किसी वित्तीय संस्थान की उचित जांच-पड़ताल और सावधानी में कमी के कारण ग्राहक के साथ धोखाधड़ी होती है, तो उस संस्थान की जवाबदेही तय होनी चाहिए। पीड़ित को हुए नुकसान की भरपाई के लिए कम-से-कम ठगी गई रकम के बराबर मुआवजे का प्रावधान करने पर जोर दिया गया।
बैंक की लापरवाही साबित होने पर भरपाई का सवाल
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने स्पष्ट किया कि बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान संदिग्ध लेनदेन को नजरअंदाज नहीं कर सकते। यदि जांच में पाया जाता है कि उचित सावधानी नहीं बरतने के कारण साइबर ठगी हुई, तो पीड़ित को मुआवजा देने की व्यवस्था होनी चाहिए। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि हर डिजिटल फ्रॉड मामले में बैंक अपने-आप पूरी रकम लौटाने के लिए बाध्य हो गया है; वित्तीय संस्थान की चूक और लागू नियम महत्वपूर्ण होंगे।
संदिग्ध लेनदेन पर तुरंत कार्रवाई की जरूरत
अदालत ने ऐसे लेनदेन पर रोक लगाने जैसे सुरक्षा उपायों की जरूरत बताई, जो ग्राहक के सामान्य बैंकिंग व्यवहार से असामान्य रूप से अलग हों। इसके अलावा संदिग्ध गतिविधियों की स्वचालित सूचना, लेनदेन की वास्तविकता की पुष्टि और जरूरत पड़ने पर ग्राहक से सीधे संपर्क करने जैसे कदमों पर जोर दिया गया। इन उपायों का उद्देश्य ठगी की रकम दूसरे खातों में पहुंचने से पहले धोखाधड़ी रोकना है।
'डिजिटल अरेस्ट' घोटाले में अपराधी खुद को पुलिस, सीबीआई, अदालत या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर लोगों को गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं। कई मामलों में वीडियो कॉल, फर्जी दस्तावेज और झूठे कानूनी आरोपों का इस्तेमाल कर पीड़ितों से पैसे ट्रांसफर करवाए जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट इस तरह के मामलों में संस्थागत जवाबदेही और प्रभावी रोकथाम के उपायों पर विचार कर रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के प्रस्तावित KYC संशोधन निर्देश, 2026 की समीक्षा करने की बात कही है। आकाशवाणी की रिपोर्ट के अनुसार, इन निर्देशों को 30 नवंबर तक अधिसूचित करने और 31 दिसंबर तक लागू करने की अपेक्षा है। अदालत ने RBI से अधिकृत वित्तीय संस्थानों की सूची भी मांगी है, ताकि संभावित निर्देशों का दायरा स्पष्ट हो सके। ये प्रस्तावित प्रावधान हैं; इन्हें अंतिम रूप से लागू मानना अभी सही नहीं होगा।
अगर किसी के खाते से धोखाधड़ी के जरिए पैसे निकल गए हैं, तो तुरंत बैंक को सूचित करें, बैंकिंग शिकायत दर्ज कराएं और राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें। शिकायत cybercrime.gov.in पर भी दर्ज की जा सकती है। बैंक से शिकायत संख्या और लिखित जवाब सुरक्षित रखें। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को स्वतः मुआवजा मिलने की गारंटी न समझें; मामले के तथ्य, बैंक की भूमिका और लागू नियमों के आधार पर जवाबदेही तय होगी।
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