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जज से दुर्व्यवहार मामले में वकील को अनोखी सजा, लगाने होंगे 1,000 फलदार पौधे

अभी-अभी • KOSHI VOICE Desk

जज से दुर्व्यवहार मामले में वकील को अनोखी सजा, लगाने होंगे 1,000 फलदार पौधे

कर्नाटक हाई कोर्ट ने अदालत की गरिमा से जुड़े एक मामले में अधिवक्ता एस. रंगास्वामी को अनोखा निर्देश देते हुए 1,000 फलदार पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का आदेश दिया है। अदालत ने उन पर ₹1,000 का सांकेतिक जुर्माना भी लगाया है। यह आदेश 1 सितंबर 2026 को न्यायमूर्ति हंचाटे संजीवकुमार ने अधिवक्ता की बिना शर्त माफी स्वीकार करने के बाद दिया।

क्या था पूरा मामला?

यह मामला कर्नाटक के कोप्पल जिले के गंगावती स्थित सत्र न्यायालय में चल रहे हत्या के मुकदमे से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, अधिवक्ता रंगास्वामी ने मुकदमे को दूसरी अदालत में स्थानांतरित करने की मांग से जुड़े विवाद के दौरान सत्र न्यायाधीश के सामने अनुचित व्यवहार किया था। हाई कोर्ट ने निचली अदालत के रिकॉर्ड का उल्लेख करते हुए कहा कि इस व्यवहार से न्यायालय की गरिमा और कार्यवाही प्रभावित हुई। ये निष्कर्ष अदालत के रिकॉर्ड और आदेश पर आधारित हैं।

कहां लगाने होंगे 1,000 पौधे?

हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि पौधे सरकारी जमीन या किसी स्कूल अथवा कॉलेज परिसर में लगाए जाएं। केवल पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं होगा; अधिवक्ता को उन्हें पानी और खाद देकर जीवित रखने की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। अदालत ने निर्देशों के पालन का हलफनामा 31 अक्टूबर 2026 तक दाखिल करने को कहा है। मामले को आगे की सुनवाई के लिए 2 नवंबर 2026 को सूचीबद्ध किया गया है।

हाई कोर्ट ने अधिवक्ता की बिना शर्त माफी स्वीकार करते हुए पहले दिए गए आदेश में बदलाव किया। इसके बाद उनके खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने, राज्य बार काउंसिल से अनुशासनात्मक कार्रवाई कराने और आपराधिक मामला शुरू करने संबंधी निर्देश वापस ले लिए गए। हालांकि, पौधे लगाने और ₹1,000 का सांकेतिक जुर्माना देने का निर्देश बरकरार रखा गया।

इस मामले में हाई कोर्ट ने कहा कि अधिवक्ता न्यायालय के अधिकारी होते हैं और उनकी जिम्मेदारी केवल अपने मुवक्किल का पक्ष रखने तक सीमित नहीं है। उन्हें अदालत, मुवक्किल और समाज—तीनों के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करना चाहिए। अदालत ने जिला न्यायपालिका के न्यायाधीशों की स्थिति का उल्लेख करते हुए न्यायिक कार्यवाही की गरिमा बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह आदेश न्यायिक अनुशासन के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा एक अनोखा निर्देश भी है।

Disclaimer: यह समाचार प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों और कर्नाटक हाई कोर्ट के आदेश पर आधारित है। मामले में अदालत के निष्कर्षों और निर्देशों को संदर्भ सहित प्रस्तुत किया गया है। खबर से संबंधित सुझाव या सुधार के लिए WhatsApp करें: 9279009245

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Published by Koshi Voice News Desk
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