मुंबई: UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR को लेकर चल रही बहस के बीच NPCI के MD और CEO दिलीप अस्बे ने बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले करोबार 75 प्रतिशत दुकानदारों ने कभी ₹2,000 से अधिक का UPI लेन-देन नहीं किया है। ऐसे छोटे कारोबारियों पर प्रस्तावित MDR का असर नहीं पड़ेगा।
बड़े कारोबारियों पर मुख्य असर
दिलीप अस्बे के अनुसार MDR से मिलने वाली कुल आय का करोबार 80 प्रतिशत हिस्सा उन बड़े कारोबारियों से आने की उम्मीद है, जिनका सालाना GMV ₹1,000 करोड़ से अधिक है। इनमें ऐसे कारोबारी भी शामिल हैं जो पहले से क्रेडिट कार्ड भुगतान पर MDR का भुगतान करते हैं। बाकी हिस्से में ₹1 करोड़ से अधिक सालाना GMV वाले कारोबारियों की भी हिस्सेदारी होगी।
छोटे दुकानदारों को राहत
NPCI के अनुसार ₹2,000 तक के UPI भुगतान और महीने में ₹1 लाख तक का कारोबार करने वाले छोटे दुकानदार MDR के दायरे से बाहर रहेंगे। रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे जरूरी क्षेत्रों के लिए ₹2,000 से अधिक के लेन-देन पर अलग फ्लैट MDR व्यवस्था लागू होगी। कैपिटल मार्केट से जुड़े लेन-देन के लिए भी अलग दर निर्धारित की गई है।
अस्बे ने कहा कि कुल UPI ट्रांजैक्शन वॉल्यूम का करोबार 96 प्रतिशत हिस्सा MDR के दायरे से बाहर रहेगा। उनके मुताबिक 0.4 प्रतिशत MDR केवल ₹2,000 से अधिक के पात्र P2M यानी Person-to-Merchant लेन-देन पर लागू होगा। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होने की बात कही गई है।
NPCI CEO ने यह भी माना कि कुछ ऐसे कारोबारी हैं जो क्रेडिट कार्ड स्वीकार नहीं करते और MDR का खर्च ग्राहकों पर डालने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि बैंक, NPCI, एक्वायरर्स और पेमेंट एग्रीगेटर्स मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि ग्राहकों से MDR के नाम पर कोई अतिरिक्त शुल्क न लिया जाए।
Disclaimer: यह खबर उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। MDR से जुड़े नियम और दरें लागू होने से पहले या बाद में संबंधित संस्थाओं द्वारा बदली जा सकती हैं। किसी समस्या या आपत्ति के लिए WhatsApp: 9279009245 पर रिपोर्ट करें।
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