
केरल में 422 किमी लंबे NH-66 का काम अगस्त के अंत तक होगा पूरा; वहीं ट्रांसमिशन लाइनों की कमी से 12 गीगावाट सोलर बिजली हो रही बर्बाद
📍 नई दिल्ली
देश के इंफ्रास्ट्रक्चर और एनर्जी सेक्टर से दो बड़ी खबरें सामने आई हैं। एक तरफ जहां केरल के वासियों के लिए बहुप्रतीक्षित NH-66 फोर-लेन प्रोजेक्ट का काम अगस्त 2026 के अंत तक पूरा होने जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सौर ऊर्जा क्षेत्र में ट्रांसमिशन नेटवर्क की कमी के चलते भारी बिजली बर्बादी की चिंताजनक तस्वीर उभरी है।
केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में पुष्टि की है कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) का 422 किलोमीटर लंबा NH-66 प्रोजेक्ट अपने अंतिम चरण में है। इस हाईवे के चालू होने से केरल में यात्रा का समय आधा रह जाएगा और लॉजिस्टिक्स व पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
“NH-66 का अझियूर से वेंगलम तक का आखिरी हिस्सा अगस्त में पूरा हो जाएगा। केंद्र सरकार ने इस साल बजट में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पूंजीगत खर्च बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ कर दिया है।”
⚡ सौर ऊर्जा क्षेत्र में संकट: ट्रांसमिशन लाइन के बिना बिजली बर्बाद
दूसरी ओर, पावर सेक्टर में बुनियादी ढांचे की सुस्ती से बड़ा नुकसान हो रहा है। सरकार ने संसद में स्वीकार किया कि देश की कुल 162 गीगावाट (GW) सौर क्षमता में से लगभग 7% यानी 12 GW बिजली केवल ट्रांसमिशन लाइनों की कमी के कारण पीक आवर्स में ग्रिड तक नहीं पहुंच पा रही है।
बिजली मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, केवल अप्रैल से जून 2026 के बीच 8,133 गीगावाट घंटा सौर बिजली ग्रिड से नहीं जुड़ सकी। इसके अलावा, लगभग 21 गीगावाट क्षमता अभी भी अस्थायी कनेक्शन के भरोसे चल रही है क्योंकि स्थायी ट्रांसमिशन नेटवर्क तैयार नहीं है।
विशेषज्ञों का कहना है कि सोलर प्लांट स्थापित करने की रफ्तार और ट्रांसमिशन लाइनें बिछाने की गति में भारी असंतुलन है, जिसे जल्द दुरुस्त करना बेहद जरूरी है।



