नेपाल राजनीति: कांग्रेस-एमाले गठबंधन में खटपट, विपक्ष की मांग
काठमांडू में सियासी हलचल तेज: नेपाली कांग्रेस और नेकपा (एमाले) के बीच सीट शेयरिंग व कार्यशैली पर मतभेद; विपक्षी खेमे ने उठाई विश्वास मत की मांग
📍 काठमांडू (नेपाल) | विशेष राजनीतिक रिपोर्ट
नेपाल के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर बड़े उलटफेर की आहट से हलचल तेज हो गई है। सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रमुख घटकों—नेपाली कांग्रेस और नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एमाले) के शीर्ष नेतृत्व के बीच सत्ता संतुलन, शक्ति बंटवारे और सरकार के दैनिक कामकाज को लेकर गहरे असमंजस की स्थिति उत्पन्न हो गई है। इस आंतरिक खींचतान के बीच प्रमुख विपक्षी दलों ने एकजुट होकर सरकार से संसद में तत्काल स्थिति स्पष्ट करने और बहुमत का प्रमाण देने की मांग की है।
सीट-बंटवारे और नीतिगत फैसलों पर एमाले व कांग्रेस के नेताओं में असंतोष, विपक्षी दलों ने मांगा जवाब।
सूत्रों के मुताबिक, एमाले के भीतर एक बड़ा धड़ा पिछले कुछ सप्ताह से सरकार के निर्णयों में अपनी उपेक्षा का आरोप लगा रहा है। अंदरूनी स्तर पर सीट-शेयरिंग मॉडल और मंत्रालयों के प्रशासनिक फैसलों को लेकर दोनों प्रमुख सहयोगी दलों में असहमति की दरार चौड़ी होती दिख रही है। यद्यपि दोनों ही दलों के शीर्ष प्रवक्ताओं ने सार्वजनिक तौर पर गठबंधन में किसी भी तरह की टूट की खबरों को सिरे से खारिज किया है, लेकिन बंद कमरों में हो रही बैठकों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
सत्तारूढ़ खेमे में फैली इस असमंजस की स्थिति को भांपते हुए विपक्षी मोर्चा आक्रामक हो गया है। विपक्षी दलों का कहना है कि यदि देश की दो सबसे बड़ी राजनीतिक शक्तियों के बीच ही आपसी तालमेल का अभाव है, तो इससे नेपाल की राष्ट्रीय स्थिरता, विकास परियोजनाओं और अंतरराष्ट्रीय साख पर सीधा प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
🗳️ विपक्ष की मांग: सदन में स्थिति स्पष्ट करे सरकार
विपक्षी नेताओं ने मांग की है कि प्रधानमंत्री और सत्तारूढ़ दल अविलंब प्रतिनिधि सभा (संसद) के समक्ष गठबंधन का वर्तमान खाका पेश करें। यदि सरकार में आंतरिक अविश्वास है, तो विधिवत रूप से सदन में विश्वास मत (Vote of Confidence) प्राप्त कर अपनी संवैधानिक स्थिति को प्रमाणित करें।
राजनैतिक विश्लेषकों का मानना—यदि मतभेद समय रहते न सुलझे तो नेपाल में बन सकते हैं नए समीकरण।
दूसरी ओर, नेपाली कांग्रेस और नेकपा (एमाले) के मुख्य समन्वयकों का कहना है कि यह एक न्यूनतम साझा कार्यक्रम को लेकर सामान्य वैचारिक विमर्श है और गठबंधन पूरी तरह एकजुट व स्थिर है। वे मिलकर अपने कार्यकाल के बचे हुए हिस्से को पूरा करेंगे और देश को आर्थिक गति प्रदान करेंगे।
बहरहाल, नेपाल की भू-राजनीतिक और आंतरिक परिस्थितियों को देखते हुए इस गतिरोध का जल्द समाधान होना बेहद आवश्यक है। आने वाले कुछ दिन नेपाल के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय करने में बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।


