नेपाल बाढ़: थर्मल कैमरा ड्रोन से सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश, राहत कार्यों में तेजी
काठमांडू, 4 सितंबर 2026। नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश बाढ़ के बाद बचाव और राहत कार्यों में ड्रोन तकनीक का अभूतपूर्व उपयोग किया जा रहा है। आपदा प्रभावित दुर्गम क्षेत्रों, खासकर जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को खोजने के लिए थर्मल कैमरा वाले ड्रोन तैनात किए गए हैं। ये ड्रोन मलबे और अंधेरे में भी मानव शरीर से निकलने वाली गर्मी को पहचानकर फंसे हुए लोगों का पता लगा रहे हैं, जिससे बचाव कार्यों में काफी तेजी आई है।
थर्मल ड्रोन का उपयोग और अंतर्राष्ट्रीय सहायता
थर्मल कैमरा ड्रोन विशेष रूप से त्रिशूली-3ए, 3बी और चिलिमे जैसी परियोजनाओं की सुरंगों में तैनात किए गए हैं, जहां बाढ़ और भूस्खलन के बाद सैकड़ों कर्मी फंस गए थे। ये ड्रोन रात में भी प्रभावी ढंग से काम कर सकते हैं और उन स्थानों तक पहुंच सकते हैं, जहां मानव पहुंच मुश्किल है। थर्मल इमेजिंग से सुरंगों में दबे या फंसे लोगों की सटीक लोकेशन का पता चल रहा है, जिससे बचाव दलों को लक्षित तरीके से काम करने में मदद मिल रही है।
इस बीच, भारत, चीन, दक्षिण कोरिया और अब ऑस्ट्रेलिया ने भी ड्रोन तकनीक और विशेषज्ञ टीमें भेजी हैं। ऑस्ट्रेलिया ने 15 सदस्यीय ड्रोन ऑपरेटरों की टीम तैनात की है, जो उन्नत LiDAR और थर्मल इमेजिंग तकनीक से लैस ड्रोनों का उपयोग कर रैपिड मैपिंग और हाई-रेजोल्यूशन इमेजिंग कर रहे हैं। भारत की टनल रेस्क्यू टीम और चीनी विशेषज्ञ भी नेपाली सेना के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।
राहत आंकड़े और भविष्य की संभावनाएं
नेपाली सेना और NDRRMA के अनुसार, ड्रोन की मदद से अब तक 280 से अधिक लोगों को सुरंगों से बाहर निकाला जा चुका है। अब तक 10,451 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है, जबकि 903 शव बरामद किए गए हैं और 4,247 लोग अभी भी लापता हैं। ड्रोन द्वारा मिली सटीक जानकारी से बचाव दलों को मलबा हटाने और फंसे लोगों तक पहुंचने में काफी मदद मिल रही है।
इस आपदा में ड्रोन के सफल उपयोग ने भविष्य में आपदा प्रबंधन में ड्रोन तकनीक की उपयोगिता को साबित कर दिया है। ड्रोन न केवल बचाव कार्यों में, बल्कि राहत सामग्री वितरण, शवों को निकालने और प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का आकलन करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
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