नेपाल बाढ़: पशुपति आर्यघाट में लापता 4,798 लोगों के लिए प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार, 1,296 मौतें
काठमांडू, 5 सितंबर 2026 – नेपाल-तिब्बत सीमा पर 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश बाढ़ में लापता हुए लोगों के लिए नेपाल की राजधानी काठमांडू के पशुपति आर्यघाट पर एक मार्मिक और भावुक कर देने वाला आयोजन हुआ। इस विनाशकारी बाढ़ में अब तक 1,296 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,798 लोग अभी भी लापता हैं। लापता लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रतीकात्मक अंत्येष्टि (सांकेतिक अंतिम संस्कार) की गई, जिसमें पवित्र कुशा घास से बनी मानव आकृतियों का उपयोग किया गया।
यह आयोजन एकता पुजा समिति (Eakta Puja Samiti) द्वारा किया गया था। समिति के अध्यक्ष भोला दास श्रेष्ठ ने बताया कि यह अनुष्ठान पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार किया गया, ताकि लापता लोगों की आत्मा को शांति मिल सके और उनके परिजनों को कुछ राहत मिल सके। उन्होंने कहा, “जब शव नहीं मिलते, तो हम कुशा घास का उपयोग कर शव का प्रतीक बनाते हैं और सभी विधियों का पालन करते हैं, ताकि आत्मा को शांति मिल सके”।
कुशा-पुतला अनुष्ठान: शव न मिलने पर आत्मा की शांति की प्रक्रिया
यह अनुष्ठान हिंदू धर्म में ‘कुशा-पुतला’ के रूप में जाना जाता है, जो तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति का शव न मिले। इस प्रक्रिया में कुशा घास से एक मानव आकृति बनाई जाती है, जिसे फिर पवित्र नदी में प्रवाहित किया जाता है, जो पारंपरिक अंत्येष्टि का प्रतीक होता है। इस आयोजन में कई परिवारों के सदस्य और स्थानीय लोग शामिल हुए। इस प्रतीकात्मक अंत्येष्टि ने बाढ़ पीड़ितों और उनके परिजनों के दर्द को एक बार फिर उजागर किया है।
इस भीषण बाढ़ ने 11 जलविद्युत परियोजनाओं को प्रभावित किया है और 583 विदेशी नागरिक (जिनमें 287 भारतीय शामिल हैं) लापता बताए जा रहे हैं। भारत, चीन, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया की बचाव टीमें राहत कार्यों में जुटी हैं। नेपाल सरकार ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन जिलों में बचाव और राहत कार्यों को तेज कर दिया है।
अब तक 8,127 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। ड्रोन तकनीक का उपयोग कर रैपिड मैपिंग और शवों को हवाई मार्ग से निकाला जा रहा है। यह आपदा हिमालयी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचा विकास की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
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