नेपाल बाढ़ त्रासदी: कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे ईशा फाउंडेशन के 77 सदस्य लापता
नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने सद्गुरु जग्गी वासुदेव के ईशा फाउंडेशन के 77 सदस्यों को लापता कर दिया है। ये सभी सदस्य कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे थे और तिब्बत के ग्यिरोंग इलाके में स्थित एक इमिग्रेशन केंद्र पर मौजूद थे, तभी अचानक आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। फाउंडेशन ने पुष्टि की है कि इन 77 सदस्यों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है।
सद्गुरु ने जताया दुख, बचाव कार्य की मांगी अनुमति
सद्गुरु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट कर इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने बताया कि इमिग्रेशन केंद्र पर मौजूद लोगों में से 495 लोग सुरक्षित लौट आए हैं, लेकिन 77 सदस्यों का कोई पता नहीं है। उन्होंने बचाव कार्यों में शामिल होने के लिए नेपाल सरकार से अनुमति मांगी है और कहा कि फाउंडेशन की टीमें राहत एवं बचाव कार्यों के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
गौरतलब है कि ईशा फाउंडेशन, कोयंबटूर स्थित एक गैर-लाभकारी संगठन है, जो हर साल कैलाश मानसरोवर यात्रा का आयोजन करता है। इस बार भी बड़ी संख्या में भारतीय तीर्थयात्रियों का एक समूह इस यात्रा पर गया था। फाउंडेशन के अनुसार, जब बाढ़ आई तो ये 77 सदस्य तिब्बत-नेपाल सीमा पर स्थित इमिग्रेशन कार्यालय में मौजूद थे।
त्रासदी का व्यापक असर: 160 से अधिक मौतें, 133 भारतीय लापता
इस त्रासदी में अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 844 से अधिक लोग लापता हैं। लापता लोगों में 133 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, जिनमें ईशा फाउंडेशन के 77 सदस्य, तमिलनाडु के 37 पर्यटक और अन्य तीर्थयात्री शामिल हैं। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, लापता भारतीय नागरिकों की संख्या 142 तक पहुंच सकती है।
भारत सरकार ने राहत कार्य तेज कर दिया है और लापता भारतीय नागरिकों की तलाश के लिए एनडीआरएफ की टीमें तैनात करने की तैयारी है। विदेश मंत्रालय ने परिजनों के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। ईशा फाउंडेशन ने भी अपने लापता सदस्यों के परिजनों से संपर्क किया है और उन्हें हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।
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