
79.5 किमी लंबे गोरखपुर–सोनौली हाईवे और 13.3 किमी लंबे भेजा–बकौर पुल से व्यापार, पर्यटन और स्थानीय आवागमन को मिलेगी अभूतपूर्व रफ्तार
📍 गोरखपुर / सोनौली / उत्तर बिहार
भारत-नेपाल सीमा पार कनेक्टिविटी और उत्तर बिहार के समग्र विकास को नई ऊंचाई पर ले जाने वाली दो विशाल बुनियादी ढांचा (Megastructure) परियोजनाएं अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं। इनके चालू होने से न केवल अंतरराष्ट्रीय व्यापार सुगम होगा, बल्कि उत्तर बिहार के कोसी क्षेत्र में कनेक्टिविटी का एक नया युग शुरू होगा।
1. गोरखपुर–सोनौली मेगा हाईवे: दिल्ली से नेपाल सफर होगा आसान
पहली प्रमुख परियोजना लगभग 79.5 किलोमीटर लंबा गोरखपुर–सोनौली फोरलेन हाईवे है, जिसका निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। सोनौली भारत और नेपाल के बीच सबसे प्रमुख एवं व्यस्ततम अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक पॉइंट है। इस हाईवे के चालू होने से दिल्ली, यूपी और देश के अन्य हिस्सों से नेपाल आने-जाने वाले यात्रियों और भारी मालवाहक वाहनों का समय काफी बचेगा।
“गोरखपुर-सोनौली हाईवे और भेजा-बकौर कोसी महासेतु से भारत-नेपाल व्यापार, सीमावर्ती पर्यटन तथा स्थानीय रोजगार के नए अवसरों का सृजन होगा।”
2. भेजा–बकौर कोसी ब्रिज: बाढ़ प्रभावित कोसी क्षेत्र की जीवनरेखा
दूसरी महत्वाकांक्षी परियोजना उत्तर बिहार का 13.3 किलोमीटर लंबा भेजा–बकौर कोसी ब्रिज (महासेतु) है। यह पुल भी अब फिनिशिंग स्टेज में है। कोसी नदी पर बन रहे इस सबसे लंबे पुल के शुरू होने से सुपौल और मधुबनी के बीच की दूरी काफी कम हो जाएगी। इससे बाढ़ प्रभावित इलाकों के लाखों निवासियों को लंबी और दुष्कर यात्रा से स्थायी मुक्ति मिलेगी।
बुनियादी ढांचा विशेषज्ञों का मानना है कि इन दोनों परियोजनाओं के चालू होने से न केवल उत्तर प्रदेश और बिहार की क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को भी एक नया आयाम मिलेगा।



