
🌧️ कोसी-सीमांचल / लाइफस्टाइल: मानसून और बरसात का मौसम आते ही बाजारों में मछली के अंडे (Fish Eggs / Roe) की मांग काफी बढ़ जाती है। बिहार के कोसी क्षेत्र और पश्चिम बंगाल में इसे एक बेहद स्वादिष्ट और पौष्टिक व्यंजन माना जाता है। स्वाद के साथ-साथ यह सेहत के लिए भी प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड का एक बेहतरीन जरिया है।
🔍 स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, मछली के अंडों में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन, विटामिन B12, ओमेगा-3 और आयरन पाया जाता है। यह मांसपेशियों को मजबूत बनाने, आंखों की रोशनी बढ़ाने और इम्युनिटी को बूस्ट करने में बेहद मददगार साबित होता है। बरसात के दिनों में जब शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने लगती है, तब इसका सेवन शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है।
- 💪 प्रोटीन का पावरहाउस: मसल्स रिकवरी और शारीरिक मजबूती के लिए उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन।
- ❤️ दिल और दिमाग के लिए फायदेमंद: ओमेगा-3 फैटी एसिड बैड कोलेस्ट्रॉल को घटाता है और दिमाग तेज करता है।
- 👁️ आंखों और हड्डियों के लिए बेहतर: विटामिन D, A और कैल्शियम से भरपूर जो हड्डियों और दृष्टि के लिए उत्तम है।
- 🩸 खून की कमी दूर करे: आयरन की अच्छी मात्रा होने के कारण यह एनीमिया की शिकायत से राहत दिलाता है।
🗣️ बिहार और बंगाल में कैसे किया जाता है पसंद? बिहार (विशेषकर कोसी और सीमांचल क्षेत्र) में मछली के अंडों में बेसन, कटा हुआ प्याज, हरी मिर्च, सरसों का तेल और मसाले मिलाकर क्रिस्पी ‘मछली के अंडे के पकोड़े’ (Fish Egg Pokora) या चोखा बनाया जाता है। वहीं पश्चिम बंगाल में इसे सरसों के मसाले के साथ तैयार करके ‘माछेर डिमर बोरा’ (Machher Dimer Bora) या तरीदार कढ़ी (Dimer Jhol) के रूप में चावल के साथ चाव से खाया जाता है।
💡 बरसात में बरतें ये सावधानियां: बरसात के मौसम में मछलियों का प्रजनन काल होता है, इसलिए यह सुनिश्चित करें कि अंडे पूरी तरह से ताजे हों। इसे हमेशा अच्छी तरह धोकर और तेज आंच पर पूरी तरह से पकाकर (Well cooked) ही खाएं ताकि पाचन से जुड़ी कोई समस्या न हो।
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