चिकन नेक कॉरिडोर को मजबूती: डुमदंगी-बागडोगरा रेल लाइन को विशेष दर्जा, पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी को बढ़ावा
केंद्र सरकार ने पूर्वोत्तर राज्यों को जोड़ने वाले रणनीतिक ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर में एक अहम फैसला लेते हुए डुमदंगी (किशनगंज) से बागडोगरा (सिलीगुड़ी) के बीच 35.76 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन को विशेष रेल परियोजना घोषित किया है। यह कदम पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा, कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने की दिशा में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस फैसले से उन सातों राज्यों को सीधा लाभ होगा जो इस संकीर्ण भू-भाग से होकर बाकी देश से जुड़ते हैं।
रणनीतिक और सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम
‘चिकन नेक’ भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को जोड़ने वाला एक संकीर्ण भू-भाग है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस कॉरिडोर को मजबूत करने के लिए नई रेल लाइन को विशेष दर्जा दिए जाने से पूर्वोत्तर तक माल और यात्री परिवहन में तेजी आएगी और सीमावर्ती इलाकों में सेना की आवाजाही भी सुगम होगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कॉरिडोर चीन और म्यांमार की सीमा से लगे इलाकों में भारत की सैन्य तैनाती और रसद आपूर्ति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।
पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा
यह रेल लाइन बिहार के किशनगंज जिले को पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से जोड़ेगी, जो पूर्वोत्तर राज्यों का प्रवेश द्वार है। इस परियोजना के पूरी होने पर असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और मेघालय तक पहुंचना आसान हो जाएगा। इस परियोजना से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा लाभ होगा। किशनगंज, जो फिलहाल रेल मानचित्र पर पिछड़ा हुआ है, अब सीधे पूर्वोत्तर और बाकी देश से जुड़ जाएगा। इससे क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और पर्यटन को भी नई गति मिलेगी। स्थानीय व्यापारियों और किसानों को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार मिल सकेगा।
रेल मंत्रालय ने इस परियोजना को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय मंजूरी और तकनीकी सर्वेक्षण का काम तेजी से किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य इस रेल लाइन को निर्धारित समय में पूरा करना है, ताकि पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी को स्थायी और मजबूत बनाया जा सके और क्षेत्र के विकास को नई दिशा दी जा सके। यह परियोजना न केवल बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगी, बल्कि पूर्वोत्तर को देश की मुख्यधारा से जोड़ने में भी मील का पत्थर साबित होगी।
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