
बिना चुने 6 महीने से अधिक समय तक मंत्री पद पर रहने का मामला; राज्यपाल कोटे से MLC बनाए जा सकते हैं पंचायती राज मंत्री
📍 पटना
बिहार की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा बिना निर्वाचित हुए मंत्री पद पर बने रहने को लेकर कड़े सवाल उठाए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एमएलसी देवेश कुमार ने विधान परिषद से अपना इस्तीफा दे दिया है।
एनडीए (NDA) सरकार अब देवेश कुमार की खाली हुई सीट पर पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश को एमएलसी बनाकर उनका मंत्री पद बचाने की कवायद में जुट गई है। गौरतलब है कि दीपक प्रकाश राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र हैं।
“अनुच्छेद 164(4) के तहत बिना चुने अधिकतम 6 महीने ही मंत्री रहा जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट में 4 अगस्त को अगली सुनवाई से पहले सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है।”
⚖️ सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और कड़े सवाल
सामाजिक कार्यकर्ता की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने बिहार सरकार से पूछा कि कोई व्यक्ति बिना निर्वाचित हुए 6 महीने से अधिक समय तक मंत्री कैसे बना रह सकता है? इस पर कोर्ट ने सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
🏛️ आगे की राजनीतिक कवायद
देवेश कुमार का कार्यकाल मार्च 2027 तक था, लेकिन उनके इस्तीफे के बाद अब मंत्रिमंडल की बैठक में दीपक प्रकाश का नाम राज्यपाल के पास मनोनीत करने की सिफारिश भेजी जाएगी। अब सभी की निगाहें 4 अगस्त को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं।


