
प्रदर्शनकारियों पर फिलहाल सख्त कार्रवाई पर रोक, सीएलटी, सीसीटीवी फुटेज और डिजिटल डेटा सुरक्षित रखने के सख्त निर्देश
देश भर में चल रहे छात्र प्रदर्शनों और उनके खिलाफ हुई पुलिसिया कार्रवाई के मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने मंगलवार को एक बेहद अहम अंतरिम आदेश जारी किया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्र सरकार और सात राज्य सरकारों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जिन छात्रों या नाबालिगों को प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार या हिरासत में लिया गया है और जिनका कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड (Criminal Record) नहीं है, उन्हें तत्काल प्रभाव से रिहा किया जाए। साथ ही, अदालत ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ फिलहाल किसी भी प्रकार की दंडात्मक (Coercive) कार्रवाई पर रोक लगा दी है।
“लोकतंत्र में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन नागरिकों का मौलिक अधिकार है। पुलिस की कथित ज्यादतियों के आरोप बेहद गंभीर हैं और इनकी निष्पक्ष जांच के लिए स्वतंत्र समिति के गठन पर विचार किया जा सकता है।” — सुप्रीम कोर्ट
📹 सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन और डिजिटल डेटा सुरक्षित रखने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस सहित संबंधित राज्यों के प्रशासन को निर्देश दिया है कि आंदोलन से जुड़े तमाम महत्वपूर्ण साक्ष्यों को बिना किसी छेड़छाड़ के सुरक्षित रखा जाए। इसमें सीसीटीवी फुटेज, ड्रोन कैमरे की रिकॉर्डिंग, बॉडी कैमरा वीडियो और पुलिस वायरलेस संवाद शामिल हैं। इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी हिदायत दी है कि प्रदर्शनकारी छात्रों की गोपनीयता बनी रहे और उनका डिजिटल डेटा सार्वजनिक न किया जाए।
केवल बेकसूर छात्रों को मिलेगी राहत
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह पूरी तरह साफ कर दिया कि यह अंतरिम राहत केवल उन छात्रों के लिए है जिनका कोई पिछला आपराधिक इतिहास नहीं है। जिन लोगों के खिलाफ पहले से ही गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं, उन्हें इस आदेश का लाभ नहीं मिलेगा।
जांच एजेंसियां दर्ज मामलों (FIR) की अपनी नियमित जांच जारी रख सकती हैं, लेकिन उन्हें किसी भी तरह की अनावश्यक सख्ती बरतने से बचना होगा। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला छात्र आंदोलनों, नागरिक अधिकारों और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

