उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य को बड़े डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर हब के रूप में विकसित करने के लिए देश का पहला समर्पित Data Corridor बनाने की योजना पेश की है। प्रस्ताव के पहले चरण में 6 गीगावाट (GW) डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना का अनुमानित निवेश करीब ₹6 लाख करोड़ बताया गया है। यह फिलहाल एक महत्वाकांक्षी प्रस्ताव है—इसे पूरा हो चुका निवेश या स्थापित क्षमता नहीं माना जाना चाहिए।
₹6 लाख करोड़ का आंकड़ा कैसे आया?
योजना के अनुमान के अनुसार, 1 GW डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने में करीब ₹1 लाख करोड़ का निवेश लग सकता है। इसी आधार पर 6 GW क्षमता के लिए लगभग ₹6 लाख करोड़ का अनुमान लगाया गया है। वास्तविक निवेश परियोजनाओं की लागत, स्थान, बिजली और कूलिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तथा निजी कंपनियों की भागीदारी के आधार पर अलग हो सकता है। अभी इस पूरी राशि को निवेशकों द्वारा अंतिम रूप से प्रतिबद्ध रकम नहीं समझना चाहिए।
BCG छह महीने में तैयार करेगी रोडमैप
इस परियोजना की योजना बनाने के लिए Boston Consulting Group (BCG) का चयन किए जाने की खबर है। कंपनी को छह महीने के भीतर रोडमैप तैयार करना है। इसके तहत संभावित स्थानों की जमीन, मिट्टी की मजबूती, पानी की उपलब्धता, बिजली आपूर्ति और अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाओं का अध्ययन किया जाएगा। राज्य परिवर्तन आयोग इस योजना की निगरानी करेगा। इन अध्ययनों के बाद ही परियोजना के स्थानों और विकास की रूपरेखा अधिक स्पष्ट होगी।
डेटा सेंटर में हजारों सर्वर लगातार चलते हैं। इन्हें चलाने के लिए चौबीसों घंटे भरोसेमंद बिजली, प्रभावी कूलिंग और पर्याप्त पानी या वैकल्पिक कूलिंग व्यवस्था की जरूरत होती है। इसलिए सिर्फ जमीन उपलब्ध होना काफी नहीं है। बिजली ग्रिड की क्षमता, पानी के दीर्घकालिक स्रोत, पर्यावरणीय प्रभाव, कनेक्टिविटी और प्राकृतिक जोखिमों का आकलन भी जरूरी होगा। BCG की व्यवहार्यता जांच यह तय करने में मदद कर सकती है कि किन क्षेत्रों में बड़े डेटा सेंटर क्लस्टर व्यावहारिक होंगे।
बड़े डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित होने पर क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल भुगतान, साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन सेवाओं के लिए जरूरी कंप्यूटिंग क्षमता बढ़ सकती है। निर्माण, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, कूलिंग सिस्टम, नेटवर्किंग, सुरक्षा और डेटा सेंटर संचालन से जुड़े व्यवसायों को भी अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, वास्तविक रोजगार और आर्थिक लाभ इस बात पर निर्भर करेंगे कि कितनी परियोजनाएं मंजूर होती हैं, उनका निर्माण कब शुरू होता है और कितनी क्षमता वास्तव में चालू होती है। प्रस्तावित क्षमता को सीधे नई नौकरियों या तत्काल आर्थिक लाभ के बराबर नहीं माना जा सकता।
उत्तर प्रदेश में पहले से डेटा सेंटर परियोजनाएं और निवेश योजनाएं मौजूद हैं। राज्य की आधिकारिक डेटा सेंटर नीति में भी निवेश, क्षमता विस्तार और बुनियादी सुविधाओं के लिए प्रोत्साहन का प्रावधान है। प्रस्तावित 6 GW Data Corridor को साकार किया गया, तो यह राज्य के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का बड़ा विस्तार होगा। लेकिन इसकी तुलना मौजूदा राष्ट्रीय क्षमता से करते समय प्रस्तावित क्षमता और चालू डेटा सेंटर क्षमता के बीच अंतर समझना जरूरी है। अगले छह महीनों में BCG का रोडमैप, व्यवहार्यता अध्ययन, स्थानों का चयन और निवेशकों की वास्तविक प्रतिबद्धताएं इस परियोजना की दिशा स्पष्ट करने वाले अहम पड़ाव होंगे।
Disclaimer: यह रिपोर्ट उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और सरकारी नीति संबंधी जानकारी पर आधारित है। ₹6 लाख करोड़ निवेश और 6 GW क्षमता को प्रस्तावित लक्ष्य व अनुमान के रूप में प्रस्तुत किया गया है; इसे अंतिम स्वीकृत निवेश या चालू क्षमता न माना जाए। परियोजना की प्रगति, निवेश और रोजगार संबंधी आंकड़ों में बदलाव संभव है। खबर से संबंधित सुझाव या सुधार के लिए WhatsApp करें: 9279009245।
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