बिहार में 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों पर CM सम्राट चौधरी की उच्च स्तरीय बैठक, पंचायतों को 51,923 करोड़ का अनुदान
पटना, 17 अगस्त 2026। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 16वें वित्त आयोग की अनुशंसाओं को राज्य में प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में राज्य को मिलने वाले अनुदान, पंचायती राज संस्थाओं के वित्तीय सशक्तिकरण और ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार का मुख्य लक्ष्य आयोग की सिफारिशों के अनुरूप पंचायतों को अधिक स्वायत्त और आत्मनिर्भर बनाना है।
पंचायतों के लिए 51,923 करोड़ रुपये का अनुदान
गौरतलब है कि 16वें वित्त आयोग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक की अवधि के लिए बिहार की त्रि-स्तरीय पंचायती राज संस्थाओं के लिए 51,923 करोड़ रुपये के अनुदान की सिफारिश की है। यह राशि ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद स्तर पर विकास योजनाओं को गति देने के लिए दी जाएगी। इस अनुदान का उपयोग मुख्य रूप से ग्रामीण सड़कों, पेयजल, स्वच्छता और सामुदायिक संपत्तियों के रखरखाव पर किया जाएगा।
प्रदर्शन-आधारित अनुदान और स्वयं के राजस्व पर जोर
हालांकि, इस अनुदान का एक बड़ा हिस्सा प्रदर्शन-आधारित होगा। केंद्र सरकार ने शर्त रखी है कि 20% राशि राज्य की पंचायती राज संस्थाओं के प्रदर्शन और स्वयं के राजस्व सृजन (Own Source Revenue) पर निर्भर करेगी। इसका मतलब है कि पंचायतों को अपने स्तर पर राजस्व बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे, जिसमें ग्रामीण संपत्ति कर, बाजार शुल्क और तालाबों के विकास से आय शामिल हो सकती है।
इस संदर्भ में पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने स्पष्ट किया है कि राज्य सरकार आयोग की प्रति घर 1,200 रुपये वार्षिक कर वसूली की सिफारिश पर लोगों पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालना चाहती। सरकार इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए पंचायतों में पड़ी सरकारी जमीनों, तालाबों और अन्य स्थानीय संसाधनों को विकसित कर आय अर्जित करने पर जोर दे रही है। बैठक में इसी वैकल्पिक रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में बिहार कैबिनेट पहले ही इन अनुदानों के वितरण और उपयोग के ढांचे को मंजूरी दे चुकी है। इस बैठक का उद्देश्य जिला स्तर पर इस ढांचे को प्रभावी ढंग से लागू करना और यह सुनिश्चित करना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों में तेजी आए। सरकार का मानना है कि इस वित्तीय सहायता से पंचायतें मजबूत होंगी और शासन में पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ेगी।
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