भारतीय नौसेना को मजबूती: रक्षा मंत्रालय ने 30 महीने के लिए लीज पर लिए दो MQ-9B सी गार्डियन ड्रोन
रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी क्षमता को और मजबूत करने के लिए एक अहम कदम उठाया है। मंत्रालय ने दो MQ-9B सी गार्डियन हाई-एल्टीट्यूड लॉन्ग-एंड्योरेंस (HALE) रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट सिस्टम (RPAS) को 30 महीने की अवधि के लिए पट्टे पर लेने हेतु अमेरिकी कंपनी जनरल एटॉमिक्स एरोनॉटिकल सिस्टम्स, इंक. (GA-ASI) के साथ समझौता किया है। इस अनुबंध की कुल कीमत लगभग ₹1,943 करोड़ (लगभग $203 मिलियन) आंकी गई है।
यह समझौता कर्तव्य भवन-2, नई दिल्ली में रक्षा विभाग के अपर सचिव एवं महानिदेशक (अधिग्रहण) ए. अंबरासु की उपस्थिति में संपन्न हुआ। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, MQ-9B सी गार्डियन अत्याधुनिक सेंसर, उन्नत प्रणालियों और परिष्कृत पेलोड से सुसज्जित है। यह प्रणाली भारतीय नौसेना की समुद्री क्षेत्र जागरूकता (Maritime Domain Awareness) क्षमताओं में उल्लेखनीय वृद्धि करेगी। ये ड्रोन समुद्री क्षेत्र के विशाल विस्तार में निरंतर खुफिया जानकारी, निगरानी और टोही (ISR) कवरेज प्रदान करेंगे।
बड़ी खरीद योजना का हिस्सा
यह पट्टा समझौता भारत की बड़ी खरीद योजना का ही एक हिस्सा है। बता दें कि अक्टूबर 2024 में, रक्षा मंत्रालय ने 31 MQ-9B ड्रोन (15 नौसेना के लिए, 8-8 सेना और वायुसेना के लिए) की खरीद के लिए लगभग $3.5 बिलियन (₹28,000 करोड़ से अधिक) का समझौता किया था। इस खरीद सौदे के तहत 31 में से 21 ड्रोन भारत में असेंबल किए जाएंगे, जिससे रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इससे पहले, भारतीय नौसेना 2020 से दो MQ-9A सी गार्डियन ड्रोन लीज पर संचालित कर रही थी। दो नए MQ-9B ड्रोन मिलने के बाद नौसेना के बेड़े में चार HALE RPAS हो जाएंगे, जिससे उसे पूर्वी और पश्चिमी दोनों समुद्री सीमाओं पर एक साथ निगरानी रखने में मदद मिलेगी। इन नए ड्रोनों का विन्यास लगभग वैसा ही होगा जैसा 31 MQ-9B ड्रोनों का होगा, जो भविष्य में आएंगे।
MQ-9B सी गार्डियन ड्रोन हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में बढ़ती चुनौतियों, विशेष रूप से पश्चिम एशिया में संघर्ष और चीन की बढ़ती गतिविधियों के बीच भारत की निगरानी क्षमता को बहुत मजबूत करेगा। यह ड्रोन लगभग 40 घंटे तक उड़ान भर सकता है और समुद्री क्षेत्र की निगरानी, पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW) और सटीक हमले (precision strike) जैसे कई मिशनों को अंजाम दे सकता है। इसके अलावा, जनरल एटॉमिक्स भारत में एक वैश्विक MRO (रखरखाव, मरम्मत और ओवरहाल) सुविधा भी स्थापित करेगा, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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