सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर हाईवे ब्लॉकेड पर कुकी-मैतेई समुदायों से मांगा प्रस्ताव, NHAI को बनाया पक्षकार
नई दिल्ली, 14 अगस्त 2026। सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर में नेशनल हाईवे-2 पर जारी ब्लॉकेड के मामले में बड़ा हस्तक्षेप करते हुए कुकी और मैतेई समुदायों से राज्य के सभी हाईवे से अवरोध हटाने का प्रस्ताव मांगा है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने दोनों पक्षों से “अब शांति के बारे में सोचने” और इस मामले को “विरोधी मुकदमेबाजी” की तरह न देखने की अपील की। अदालत ने इस मामले में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को भी पक्षकार बनाया है।
जनहित याचिका पर सुनवाई और ब्लॉकेड का प्रभाव
यह सुनवाई ‘कुकी महिला संगठन फॉर ह्यूमन राइट्स’ की ओर से दायर जनहित याचिका (PIL) पर हुई, जिसमें NH-2 पर लगे ब्लॉकेड को हटाने और प्रभावित जिलों में आवश्यक सेवाओं और खाद्य आपूर्ति को बहाल करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता की ओर से सीनियर एडवोकेट आनंद ग्रोवर ने कोर्ट को बताया कि ब्लॉकेड के कारण खाने-पीने की वस्तुओं की सप्लाई ठप हो गई है, बच्चों की स्कूलिंग प्रभावित हुई है और अन्य जरूरी सेवाएं चरमरा गई हैं। उन्होंने राज्य सरकार की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाए।
CJI सूर्य कांत ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा कि हाईवे आम आदमी की जीवनरेखा होते हैं, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोर्ट कोई व्यापक आदेश जारी करता है और राज्य सरकार उसके पालन में बाधा डालती है, तो इसका परिणाम मासूम लोगों के खिलाफ हिंसा के रूप में सामने आ सकता है। कोर्ट ने दोनों पक्षों से आग्रह किया कि वे समझें कि हाईवे ब्लॉकेड से किसी भी समुदाय का भला नहीं हो रहा है।
कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें
सुनवाई के दौरान, इंटरनेशनल मैतेई संगठन के वकील ने याचिका को “शरारतपूर्ण” करार दिया और दावा किया कि याचिकाकर्ता खुद हाईवे ब्लॉक कर रहे थे। वहीं, ग्रोवर ने दावा किया कि कुकी उग्रवादियों ने ब्लॉकेड हटा लिया था। इस पर CJI ने दोनों पक्षों से इस बात पर विचार करने को कहा कि अगर किसी एजेंसी की मदद से नेशनल हाईवे को फिर से काम करने दिया जाए तो क्या समस्या है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह इस मुकदमे को दो विरोधी पक्षों की लड़ाई के रूप में नहीं देखना चाहता।
जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि ब्लॉकेड हटाने के मुद्दे को पूरे राज्य के परिप्रेक्ष्य में देखा जाना चाहिए, न कि टुकड़ों-टुकड़ों में। उन्होंने यह भी गौर किया कि अदालत में नागा समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं है, जो भी इस मामले में संबंधित हो सकता है। कोर्ट ने मैतेई संगठन से NH-2 के अलावा अन्य हाईवे की लिस्ट मांगी है जो फिलहाल ब्लॉक हैं। अब मामले की अगली सुनवाई के लिए तारीख तय की जाएगी और तब तक दोनों पक्षों को अपना-अपना प्रस्ताव कोर्ट के समक्ष रखना होगा।
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