CM सम्राट चौधरी की BJP मंत्रियों के साथ देर रात बड़ी बैठक, सख्त निर्देश
बांकीपुर उपचुनाव परिणाम व सियासी जुबानी जंग के बीच हाई-लेवल मीटिंग: पारदर्शिता, फिजूलखर्ची पर रोक और डिजिटल एक्टिविटी बढ़ाने का अल्टीमेटम
📍 पटना (बिहार) | राजनीतिक विशेष रिपोर्ट
बिहार की राजनीति में तेजी से बदलते घटनाक्रमों के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार देर रात भारतीय जनता पार्टी (BJP) कोटे के सभी कैबिनेट मंत्रियों के साथ एक हाई-प्रोफाइल समीक्षा बैठक बुलाई। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों के विभागीय कामकाज, बजट क्रियान्वयन और जनसमस्याओं के निष्पादन का बारीकी से लेखा-जोखा लिया और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए।
विभागीय पारदर्शिता, सरकारी खर्चों में कटौती और योजनाओं के त्वरित जमीनी क्रियान्वयन पर जोर।
समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी लालफीताशाही के समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए। इसके लिए सभी विभाग प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल और पारदर्शी बनाएं। साथ ही, विभागों में होने वाले अनावश्यक और गैर-जरूरी खर्चों पर तुरंत अंकुश लगाने तथा बजटीय राशि का अधिकतम उपयोग जनहित के कार्यों में करने के कड़े निर्देश दिए गए।
बैठक में डिजिटल संवाद पर विशेष बल देते हुए मुख्यमंत्री ने सभी मंत्रियों को सोशल मीडिया पर अपनी सक्रियता बढ़ाने को कहा। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक दौर में सरकार की नीतियों, विभागीय उपलब्धियों और त्वरित राहत कार्यों को सीधे जनता तक पहुँचाने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स सबसे सशक्त माध्यम हैं, जिस पर मंत्रियों को रोजाना अपडेट्स साझा करने होंगे।
🗳️ उपचुनाव के नतीजों और सियासी हमलों के बीच रणनीति
हालिया बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के नतीजों के तुरंत बाद बुलाई गई इस मैराथन बैठक को बेहद संवेदनशील और रणनीतिक माना जा रहा है। जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर द्वारा उपचुनाव परिणामों को लेकर उठाए गए सवालों और राजनीतिक बयानों के बीच, सत्ता पक्ष ने अपनी कार्यशैली को और अधिक आक्रामक व परिणामोन्मुख बनाने का खाका तैयार किया है।
जनता से सीधा संवाद स्थापित करने के लिए मंत्रियों को सोशल मीडिया सक्रियता बढ़ाने की हिदायत।
देर रात तक चली इस समीक्षा बैठक से यह साफ संकेत मिलता है कि राज्य सरकार अपने शासन मॉडल और जन-कनेक्ट को मजबूत करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इन कड़े निर्देशों का जमीनी स्तर और आगामी राजनीतिक परिदृश्य पर क्या असर पड़ता है।


