सुगौली संधि की मूल प्रति गायब, संसद में नेपाल सरकार का खुलासा
नेपाल की संसद में विदेश मंत्री की पुष्टि से मचा हड़कंप; कालापानी-सुस्ता विवाद पर असर की आशंका, पीएम बालेन्द्र शाह ने चीनी राजदूत से की मुलाकात
📍 काठमांडू (नेपाल) | विशेष कूटनीतिक रिपोर्ट
नेपाल के राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों में उस समय बड़ा हड़कंप मच गया जब विदेश मंत्री ने संसद (प्रतिनिधि सभा) को औपचारिक रूप से सूचित किया कि भारत-नेपाल सीमा का मुख्य ऐतिहासिक आधार मानी जाने वाली वर्ष 1816 की ‘सुगौली संधि’ (Sugauli Treaty) की मूल प्रति (Original Copy) सरकारी अभिलेखागार से गायब है। इस आधिकारिक पुष्टि ने नेपाल के अंतरराष्ट्रीय सीमा दावों और कूटनीतिक स्थिति पर नए गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
1816 की ऐतिहासिक सुगौली संधि की ओरिजिनल कॉपी का पता नहीं; संसद में विदेश मंत्री ने की पुष्टि।
उल्लेखनीय है कि ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ युद्ध के बाद 1816 में हस्ताक्षरित यह संधि नेपाल के प्रादेशिक नक्शे का मुख्य आधार है, जिसके तहत नेपाल को अपना लगभग एक-तिहाई भू-भाग (1.77 लाख वर्ग किमी) गंवाना पड़ा था। यही संधि मेची नदी (पूर्वी सीमा) और महाकाली नदी (पश्चिमी सीमा) को नेपाल के नक्शे के रूप में निर्धारित करती है। कालापानी, लिम्पियाधुरा और सुस्ता जैसे विवादित क्षेत्रों पर नेपाल का मुख्य वैधानिक दावा इसी दस्तावेज पर निर्भर है।
हालांकि इस दस्तावेज के गुम होने की अफवाहें पहले भी तैरती रही हैं, लेकिन संसद के पटल पर सरकार द्वारा इसे आधिकारिक रूप से स्वीकार किए जाने से देश में तीखी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि मूल प्रति न होने से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नेपाल का पक्ष कमजोर हो सकता है, हालांकि नेपाल सरकार का कहना है कि अन्य सहायक अभिलेखों के जरिए राजनयिक प्रयास जारी रहेंगे।
🇨🇳 पीएम बालेन्द्र शाह की चीनी राजदूत से मुलाकात और संतुलित कूटनीति
इसी बीच, नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने चीनी राजदूत झांग माओमिंग के साथ एक उच्चस्तरीय शिष्टाचार मुलाकात की है। बैठक में द्विपक्षीय व्यापारिक साझेदारी, अवसंरचना विकास और आर्थिक सहयोग पर विस्तार से चर्चा हुई।
चीन-नेपाल आर्थिक गलियारे और बहुआयामी विदेश नीति के तहत संबंधों को संतुलित करने की कवायद।
राजनैतिक विश्लेषकों का मानना है कि बालेन्द्र शाह नीत सरकार अपनी ‘आर्थिक कूटनीति’ के तहत भारत और चीन—दोनों विशाल पड़ोसियों के बीच एक समान और संतुलित दूरी व सहयोग की नीति पर काम कर रही है। नेपाल अपनी संप्रभुता से समझौता किए बिना विकास परियोजनाओं को गति देना चाहता है।
सुगौली संधि की मूल प्रति का गायब होना जहां नेपाल के लिए एक बड़ा आंतरिक व कूटनीतिक झटका है, वहीं प्रधानमंत्री की बीजिंग के साथ बढ़ती निकटता दक्षिण एशिया के राजनीतिक परिदृश्य पर असर डाल सकती है।


