भारत-नेपाल सुस्ता सीमा विवाद गहराया, पुलिस चौकी पर भारत सख्त
नेपाल ने विवादित क्षेत्र में पुलिस चौकी बनाने की कोशिश की: पश्चिम चंपारण सीमा पर तनाव; भारत की कड़ी आपत्ति के बाद उच्चस्तरीय वार्ता जारी
📍 काठमांडू / नई दिल्ली | विशेष कूटनीतिक रिपोर्ट
भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील सुस्ता (Susta) क्षेत्र में एक बार फिर दोनों देशों के बीच सीमा विवाद गहरा गया है। नेपाल की ओर से इस विवादित क्षेत्र में एक नई पुलिस चौकी (Police Post) के निर्माण का प्रयास किया गया, जिस पर भारत सरकार और सीमा सुरक्षा बल (SSB) ने बेहद कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। तनाव बढ़ने के बाद दोनों देशों के वरिष्ठ प्रशासनिक व विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के बीच वार्ता जारी है, हालांकि अभी तक कोई अंतिम समाधान नहीं निकल सका है।
विवादास्पद सुस्ता क्षेत्र में नेपाल द्वारा पुलिस चौकी निर्माण का प्रयास, भारत ने जताई कूटनीतिक आपत्ति।
भौगोलिक दृष्टि से सुस्ता क्षेत्र नेपाल के पश्चिमी नवलपरासी जिले और बिहार के पश्चिम चंपारण (West Champaran) जिले के मध्य गंडक नदी (नारायणी) के तटीय क्षेत्र में स्थित है। गंडक नदी की लगातार बदलती धारा और दोनों देशों के भिन्न-भिन्न ऐतिहासिक मानचित्रों के कारण यह इलाका लंबे समय से अनसुलझा रहा है। नेपाल पक्ष जहां ऐतिहासिक आधार पर सीमल पेड़ (Simal Tree) को प्रामाणिक सीमा मानता है, वहीं भारतीय पक्ष भेलोर पेड़ (Bhelor Tree) को आधिकारिक सीमा रेखा का मुख्य आधार मानता है।
ताजा विवाद तब सामने आया जब नेपाली सशस्त्र प्रहरी बल (APF) ने विवादित नो-मैंस लैंड के समीप निर्माण सामग्री जुटाकर पुलिस चौकी की आधारशिला रखने की कोशिश की। इसकी जानकारी मिलते ही भारतीय सीमा सुरक्षा अधिकारियों ने तत्काल निर्माण कार्य रुकवाया और स्पष्ट किया कि जब तक संयुक्त सीमा समिति द्वारा अंतिम सीमांकन नहीं हो जाता, तब तक किसी भी स्थायी या अस्थायी निर्माण से बचा जाना चाहिए।
🤝 कूटनीतिक वार्ता और यथास्थिति बनाए रखने पर सहमति
भारत की सख्त आपत्ति के पश्चात नेपाल प्रशासन ने निर्माण कार्य फिलहाल स्थगित कर दिया है और बातचीत के जरिए ही मसले को सुलझाने की प्रतिबद्धता जताई है। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय बैठकों का दौर जारी है। भारत ने स्पष्ट रुख अपनाया है कि किसी भी प्रकार का एकतरफा निर्माण अंतरराष्ट्रीय सीमा मानदंडों और आपसी विश्वास का उल्लंघन है।
सीमा पर यथास्थिति (Status Quo) बनाए रखने तथा द्विपक्षीय तंत्र द्वारा समस्या समाधान पर बनी सहमति।
सुस्ता विवाद सदियों पुराने भारत-नेपाल संबंधों के लिए एक अत्यंत संवेदनशील बिंदु रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि गंडक नदी के बहाव से उपजे इस भौगोलिक सीमा विवाद को दोनों देशों को शांतिपूर्ण संवाद, तकनीकी सर्वेक्षण और उच्चस्तरीय कूटनीति से सुलझाना चाहिए ताकि सदियों पुराने ‘बेटी-रोटी’ के सांस्कृतिक संबंधों पर आंच न आए।
फिलहाल सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति बनी हुई है और दोनों देशों के सुरक्षा बल लगातार समन्वय बनाए हुए हैं। स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और सभी की निगाहें आगामी विदेश मंत्रालय स्तर की वार्ता पर टिकी हुई हैं।


