
कंपनियों का बड़ा बजट AI और डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर पर हो रहा खर्च; फ्रेशर्स के लिए अवसर सीमित होने की आशंका
📍 नई दिल्ली | टेक्नोलॉजी डेस्क
भारत के प्रमुख सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म Zoho के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने सूचना प्रौद्योगिकी (IT) उद्योग में रोजगार के भविष्य और बदलती प्राथमिकताओं को लेकर एक महत्वपूर्ण विश्लेषण साझा किया है। उनका कहना है कि वर्तमान समय में IT कंपनियां पहले की तुलना में कम नई नौकरियां पैदा कर रही हैं।
इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि टेक कंपनियों का भारी-भरकम बजट अब नए मानव संसाधनों (Human Resources) की भर्ती के बजाय कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) मॉडल, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और विशाल डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर खर्च हो रहा है।
“बड़ी टेक कंपनियां अपने AI मॉडल, क्लाउड सेवाओं और डेटा सेंटर तैयार करने पर अरबों रुपये लगा रही हैं। यही वजह है कि IT सेक्टर में पहले जैसी बड़े पैमाने पर एंट्री-लेवल भर्ती देखने को नहीं मिल रही है।” — श्रीधर वेम्बू
🤖 युवाओं और फ्रेशर्स के लिए बदलती चुनौतियाँ
श्रीधर वेम्बू के अनुसार, इस तकनीकी बदलाव का सबसे अधिक असर इंजीनियरिंग पास-आउट फ्रेशर्स और शुरुआती स्तर के उम्मीदवारों पर पड़ रहा है। IT उद्योग में पारंपरिक कोडिंग और बेसिक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट से जुड़ी नौकरियों में कमी आ सकती है, जबकि नए एडवांस्ड स्किल्स की मांग में अभूतपूर्व उछाल आएगा।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में केवल सामान्य डिग्री पर्याप्त नहीं होगी। मशीन लर्निंग (ML), डेटा इंजीनियरिंग, साइबर सुरक्षा, क्लाउड कंप्यूटिंग और ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञता रखने वाले युवाओं के लिए ही नए और बेहतर अवसर पैदा होंगे।
💡 भविष्य के लिए क्या है सलाह?
विशेषज्ञों का कहना है कि छात्रों और नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को AI को एक खतरे के रूप में देखने के बजाय इसे एक टूल के रूप में अपनाना होगा। जो पेशेवर और छात्र समय रहते नई तकनीकों और AI टूल्स का उपयोग सीख लेंगे, उनके लिए रोजगार के बाजार में अपार संभावनाएं बनी रहेंगी।

