
NEET-UG विवाद के बाद केंद्र सरकार का बड़ा कदम: संगठित पेपर लीक गिरोहों को 10 साल की सजा और ₹10 करोड़ जुर्माने का प्रावधान
📍 नई दिल्ली
लोकसभा में भारी हंगामे और विपक्षी दलों के वॉकआउट के बीच बहुप्रतीक्षित ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ को ध्वनिमत (Voice Vote) से पारित कर दिया गया है। देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने और पेपर लीक माफिया पर शिकंजा कसने के उद्देश्य से लाए गए इस विधेयक को अब आगे की प्रक्रिया के लिए राज्यसभा में पेश किया जाएगा।
NEET-UG 2026 मामले के बाद उभरे जनआक्रोश को देखते हुए सरकार ने इस विधेयक के जरिए 2024 के मूल कानून को और अधिक सख्त तथा प्रभावी बना दिया है।
“संगठित गिरोहों पर ₹10 करोड़ तक का जुर्माना और 10 साल की जेल, परीक्षा केंद्रों/सेवा प्रदाताओं पर 8 साल का बैन; हर राज्य में बनेंगे स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट।”
⚖️ संशोधन बिल के मुख्य और सख्त प्रावधान:
• अनुचित साधन उपयोग: सजा को बढ़ाकर 5 से 10 वर्ष किया गया तथा जुर्माना ₹50 लाख तक तय किया गया है।
• संगठित पेपर लीक माफिया: 7 से 10 साल की कठोर कैद और ₹10 करोड़ तक का भारी जुर्माना।
• सेवा प्रदाता कंपनियां: गड़बड़ी पाए जाने पर ₹5 करोड़ तक का जुर्माना और 8 साल तक का प्रतिबंध।
• त्वरित सुनवाई: 2 महीने में जांच और 3 महीने में ट्रायल पूरा करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन।
कोशी-सीमांचल के लाखों प्रतियोगी छात्रों में जगी उम्मीद
इस कानून का सीधा असर बिहार के कोशी-सीमांचल (पूर्णिया, सुपौल, अररिया, सहरसा) क्षेत्र के लाखों युवाओं पर पड़ेगा जो दिन-रात परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। स्थानीय छात्र संगठनों और अभ्यर्थियों ने कड़े कानून का स्वागत किया है, हालांकि उन्होंने मांग की है कि कानून के कागजों से निकलकर जमीनी स्तर पर निष्पक्षता से लागू होना ही असली न्याय होगा।



