Bheja-Bakaur Koshi Bridge: 13.3 किमी लंबा कोसी मेगा ब्रिज निर्माण के अंतिम चरण में, मिथिला और कोसी क्षेत्र की बदलेगी तस्वीर

कोसी नदी पर 13.3 किलोमीटर लंबे भेजा-बकौर मेगा पुल का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। वित्तीय वर्ष 2026-27 तक पूरा होने वाला यह पुल मधुबनी, सुपौल और सहरसा जिलों को आपस में जोड़ेगा, जिससे व्यापार और आवागमन में अभूतपूर्व सुधार होगा।

बिहार के इंफ्रास्ट्रक्चर और सड़क नेटवर्क की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल होने जा रही है। कोसी नदी पर निर्माणाधीन देश का बहुप्रतीक्षित और अत्यंत महत्वाकांक्षी 13.3 किलोमीटर लंबा भेजा-बकौर कोसी मेगा ब्रिज अब अपने निर्माण के अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इस मेगा प्रोजेक्ट के पूरा होने से मिथिलांचल और कोसी क्षेत्र के बीच कनेक्टिविटी का एक नया अध्याय शुरू होने जा रहा है।

यह विशालकाय पुल मधुबनी जिले के भेजा और सुपौल जिले के बकौर को आपस में जोड़ता है। इसके पूरी तरह चालू हो जाने से मधुबनी, सुपौल, सहरसा और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों के लाखों लोगों को सीधा लाभ पहुंचेगा। अब तक लोगों को इन जिलों के बीच यात्रा करने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी या फिर उफनती कोसी नदी में नावों का सहारा लेना पड़ता था, लेकिन इस पुल के बनने से घंटों का सफर मिनटों में सिमट जाएगा।

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वित्तीय वर्ष 2026-27 तक इस पुल को पूरी तरह से आम जनता के आवागमन के लिए खोल दिए जाने का लक्ष्य रखा गया है। पुल के निर्माण में अत्याधुनिक इंजीनियरिंग और तकनीकों का उपयोग किया गया है ताकि यह कोसी नदी के भीषण प्रवाह और हर साल आने वाली बाढ़ के दबाव को आसानी से झेल सके। पुल के दोनों ओर एप्रोच रोड और सुरक्षा तटबंधों का काम भी युद्धस्तर पर पूरा किया जा रहा है।

विशेष रूप से बाढ़ से प्रभावित होने वाले इन सुदूरवर्ती इलाकों के लिए यह पुल किसी जीवनरेखा (Lifeline) से कम साबित नहीं होगा। मानसून के दौरान जब पूरा इलाका जलमग्न हो जाता था और संपर्क कट जाता था, उस दौरान भी इस पुल के माध्यम से निर्बाध आवागमन जारी रहेगा। इससे आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और रोजमर्रा की जरूरतों तक स्थानीय लोगों की पहुंच काफी आसान हो जाएगी।

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स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और क्षेत्र के जन प्रतिनिधियों में इस ऐतिहासिक सौगात को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस पुल के चालू होने से पूरे उत्तरी बिहार में व्यापारिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी, कृषि उत्पादों को मंडियों तक पहुंचाना आसान होगा और क्षेत्र का आर्थिक तथा सामाजिक विकास तेजी से होगा।

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Koshi Voice News Desk

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