
पारंपरिक खेती छोड़ फूलों की खेती की ओर किसानों का रुझान
उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले और आसपास के क्षेत्रों में कृषि के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। न्यूज़18 लोकल (Local18) की रिपोर्ट के अनुसार, गेहूं, धान और गन्ने जैसी पारंपरिक फसलों की जगह किसान अब तेजी से कमर्शियल फ्लोरीकल्चर (व्यावसायिक फूलों की खेती) की ओर रुख कर रहे हैं। कम लागत, कम समय और बाजार में बारह महीने मांग रहने के कारण फूलों की खेती किसानों के लिए बेहद लाभदायक और कम जोखिम वाला सौदा साबित हो रही है।
अमरोहा में बंपर मुनाफा देने वाले ‘टॉप 5’ फूल:
गेंदा (Marigold / Tagetes):
मांग और लाभ: पूजा-पाठ, त्योहारों और शादियों के सीजन में गेंदे के फूल की मांग सबसे ज्यादा रहती है।
फायदे: यह फसल मात्र 2 से 3 महीने में तैयार हो जाती है और इसे साल में कई बार उगाया जा सकता है। कम सिंचाई और देखभाल में भी किसान प्रति एकड़ लाखों रुपये का मुनाफा कमा सकते हैं।
गुलाब (Rose):
मांग और लाभ: कट फ्लावर (Cut Flower), गुलदस्ते, इत्र और कॉस्मेटिक इंडस्ट्री में गुलाब की मांग सालभर बनी रहती है।
फायदे: एक बार गुलाब के पौधे लगाने के बाद कई सालों तक लगातार पैदावार मिलती है। पॉलीहाउस तकनीक का इस्तेमाल कर किसान इससे प्रीमियम मुनाफा कमा रहे हैं।
रजनीगंधा (Tuberose):
मांग और लाभ: रजनीगंधा की सुगंधित स्टिक्स और ढीले फूलों का इस्तेमाल माला बनाने तथा सुगंधित तेल (Essential Oils) निकालने में होता है।
फायदे: इसकी खेती से लंबी अवधि तक लगातार आवक होती है और मंडियों में इसके हमेशा अच्छे दाम मिलते हैं।
ग्लेडियोलस (Gladiolus):
मांग और लाभ: शादियों और सजावटी बुके (Bouquets) के लिए ग्लेडियोलस की स्टिक्स सबसे ज्यादा पसंद की जाती हैं।
फायदे: इसकी कंद (Bulbs) लगाकर कम समय में बहुत अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। यह कट-फ्लावर सेगमेंट की सबसे महंगी फसलों में से एक है।
जर्बेरा (Gerbera):
मांग और लाभ: आधुनिक और हाई-टेक फ्लोरीकल्चर में जर्बेरा का नाम सबसे ऊपर है। बड़े शहरों और इवेंट मैनेजमेंट में इसकी जबरदस्त मांग है।
फायदे: ग्रीनहाउस या संरक्षित खेती (Protected Farming) के तहत जर्बेरा उगाकर किसान सालभर निरंतर और बंपर आय प्राप्त कर सकते हैं।
सरकारी प्रोत्साहन और बाजार का साथ
उद्यान विभाग (Horticulture Department) भी किसानों को फूलों की खेती अपनाने के लिए बीज, ड्रिप इरिगेशन और पॉलीहाउस निर्माण पर भारी सब्सिडी दे रहा है। दिल्ली और एनसीआर (NCR) से निकटता के कारण अमरोहा के किसानों को दिल्ली की गाजीपुर मंडी जैसी बड़ी मंडियों में आसानी से खरीदार मिल जाते हैं, जिससे उन्हें परिवहन का ज्यादा खर्च भी नहीं उठाना पड़ता।
Disclaimer: Koshi Voice News पर प्रकाशित यह कृषि समाचार न्यूज़18 लोकल18 की रिपोर्ट, स्थानीय उद्यान विभाग के आंकड़ों और कृषि विशेषज्ञों की सलाह पर आधारित है। किसी भी प्रकार की व्यावसायिक खेती शुरू करने से पहले अपनी मिट्टी की जांच कराएं और स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) से परामर्श जरूर लें।


