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Sambalpuri Ikat Odisha Art: भारतीय हस्तशिल्प और हथकरघा (Handloom) की गूंज अब सात समंदर पार भी सुनाई दे रही है। ओमान में स्थित भारतीय दूतावास (Embassy of India in Oman) ने सोशल मीडिया पर ओडिशा की सदियों पुरानी पारंपरिक ‘बांधा’ (Baandha) कला और संबलपुरी इकत (Sambalpuri Ikat) की तारीफ में एक बेहद खूबसूरत पोस्ट साझा की है। दूतावास ने इस कला को ‘पीढ़ियों के ताने-बाने से बुनी विरासत’ (Woven Across Generations) बताते हुए कहा है कि यह सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार के इतिहास का चलता हुआ अटूट धागा है।
किताबों से नहीं, दादा-दादी के प्यार और हुनर से आगे बढ़ती है यह कला ओमान में भारतीय दूतावास की ओर से जारी किए गए पोस्ट के मुताबिक, ओडिशा में ‘बांधा’ कला को सिखाने के लिए किसी किताबी ज्ञान या पाठ्यपुस्तकों की जरूरत नहीं पड़ती। यह अनूठा हुनर परिवार के भीतर ही एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को प्यार, बारीक अवलोकन और करघे (Pit Loom) पर एक साथ बिताए पलों के जरिए सौंपा जाता है। इस क्राफ्ट की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि घर के बुजुर्ग (दादा-दादी) अपने पोते-पोतियों के उत्सुक हाथों को गाइड करते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि सदियों पुरानी यह अनूठी पहचान कभी फीकी न पड़े।
हर डिजाइन में छिपी है जिंदा रहने के संघर्ष और सांस्कृतिक गौरव की कहानी संबलपुरी इकत की यह बुनाई दुनिया भर में अपनी अनूठी डिजाइनिंग के लिए जानी जाती है। दूतावास ने लिखा है कि इस कपड़े पर दिखने वाला हर जीवंत मोटिफ (Vibrant Motif) सिर्फ एक कलाकृति नहीं है, बल्कि वह अस्तित्व के संघर्ष (Survival), गहरे सांस्कृतिक गौरव और इंसानी हुनर के बेजोड़ तालमेल की एक अनकही कहानी कहता है। जब कोई व्यक्ति संबलपुरी इकत का एक टुकड़ा अपने हाथ में थामता है, तो वह केवल कपड़े का टुकड़ा नहीं छू रहा होता, बल्कि अतीत से सीधे भविष्य में बहते परिवार के इतिहास को महसूस कर रहा होता है।
वैश्विक पटल पर भारत के हथकरघा को मिल रही नई पहचान
भारत सरकार के #BharatChronicles अभियान के तहत शेयर की गई इस पोस्ट का मकसद दुनिया भर में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहरों को बढ़ावा देना है। ओडिशा के बुनकरों का यह हुनर आज के मशीनरी युग में भी पूरी दुनिया को आकर्षित कर रहा है। सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को काफी सराहा जा रहा है, और लोग भारतीय बुनकरों की कड़ी मेहनत और उनकी कला को सलाम कर रहे हैं।
निष्कर्ष
ओडिशा की संबलपुरी इकत और ‘बांधा’ कला भारत की उस जीती-जागती विरासत का हिस्सा हैं, जो आधुनिकता की आंधी में भी मजबूती से खड़ी हैं। ओमान में भारतीय दूतावास द्वारा इस कला को वैश्विक स्तर पर इस तरह से रेखांकित करना हमारे स्थानीय बुनकरों के मनोबल को बढ़ाने वाला है। यह पोस्ट हमें याद दिलाती है कि ‘लोकल’ को ‘ग्लोबल’ बनाने की ताकत हमारे देश की मिट्टी और यहां के पारंपरिक हुनर में कूट-कूट कर भरी है।
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