2047 तक विकसित शहर बनाने की तैयारी
नालंदा जिले के बिहारशरीफ को आने वाले वर्षों में औद्योगिक, शैक्षणिक और आधुनिक शहरी केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना सामने आई है। प्रस्तावित मास्टर प्लान 2047 में उद्योग, परिवहन, पेयजल, हरित क्षेत्र और शहरी आधारभूत संरचना के विस्तार पर जोर दिया गया है। बिहारशरीफ आयोजना क्षेत्र के लिए GIS आधारित मास्टर प्लान का स्टेज-5 तैयार किया जा रहा है। इसके दायरे में नगर निगम क्षेत्र के 36 मौजों के साथ आसपास के 28 ग्रामीण मौजे यानी कुल 64 राजस्व गांव शामिल किए जाने हैं।
मोरातालाब में लेदर इंडस्ट्री पार्क का प्रस्ताव
प्रस्तावित विकास खाके में मोरातालाब में 127.88 हेक्टेयर भूमि पर लेदर इंडस्ट्री पार्क विकसित करने की योजना बताई गई है। इससे जूता-चप्पल और चमड़ा आधारित उद्योगों को संगठित स्वरूप देने, स्थानीय उद्यमियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने और रोजगार के अवसर बढ़ाने की संभावना है। मोरातालाब क्षेत्र में पहले से लेदर एवं नॉन-लेदर फुटवियर उद्योगों का क्लस्टर मौजूद रहा है।
नालंदा नॉलेज टाउनशिप और लॉजिस्टिक्स हब
योजना के प्रस्तावित विवरण में 108.21 हेक्टेयर में नालंदा नॉलेज टाउनशिप और 144.55 हेक्टेयर में लॉजिस्टिक्स-कम-इंडस्ट्रियल नोड विकसित करने का प्रस्ताव शामिल है। नॉलेज टाउनशिप से शिक्षा, शोध और संस्थागत गतिविधियों को बढ़ावा देने की परिकल्पना है। वहीं, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक केंद्र से माल भंडारण, परिवहन, वितरण तथा कारोबार से जुड़ी गतिविधियों को व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
तीन रिंग रोड, पांच फ्लाईओवर और नए ROB
बिहारशरीफ की बढ़ती आबादी और यातायात दबाव को देखते हुए प्रस्तावित योजना में तीन रिंग रोड नेटवर्क और पांच फ्लाईओवर का प्रावधान बताया गया है। इसके अलावा तीन नए रेलवे ओवरब्रिज (ROB) बनाने की योजना भी शामिल है। इनका उद्देश्य शहर के प्रमुख मार्गों पर जाम कम करना, रेलवे क्रॉसिंग पर निर्भरता घटाना और अलग-अलग शहरी क्षेत्रों के बीच आवागमन आसान बनाना है।
पेयजल और नदी किनारे विकास की परिकल्पना
पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए मधुबन में 100 MLD क्षमता का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट प्रस्तावित है। MLD यानी मिलियन लीटर प्रतिदिन। इस क्षमता का संयंत्र प्रतिदिन 10 करोड़ लीटर पानी के शोधन की क्षमता रखता है। शहर के विस्तार के साथ बढ़ने वाली पेयजल जरूरतों को पूरा करने के लिए ऐसी परियोजना महत्वपूर्ण हो सकती है। इसके अलावा प्रस्तावित मास्टर प्लान में पंचाने और सिकरी नदियों के किनारे रिवरफ्रंट विकसित करने की योजना भी बताई गई है। इसके तहत नदी किनारों का सौंदर्यीकरण, सार्वजनिक स्थानों का विकास और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी सुविधाएं विकसित करने की परिकल्पना है। इसके सफल क्रियान्वयन के लिए जलनिकासी, बाढ़ प्रबंधन और नदी के प्राकृतिक प्रवाह का ध्यान रखना जरूरी होगा।
हरित क्षेत्र बढ़ाने का लक्ष्य
शहर में हरियाली बढ़ाने के लिए मौजूदा हरित क्षेत्र को एक प्रतिशत से भी कम स्तर से बढ़ाकर 15 प्रतिशत से अधिक करने का लक्ष्य प्रस्तावित है। इसके लिए नए पार्क, शहरी वन और खुले सार्वजनिक स्थान विकसित करने की योजना है। इससे प्रदूषण नियंत्रण, तापमान में कमी और नागरिकों को बेहतर सार्वजनिक स्थान उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
अभी क्या है योजना की स्थिति?
4 नवंबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, बिहारशरीफ आयोजना क्षेत्र के लिए GIS आधारित मास्टर प्लान का प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। परामर्शी एजेंसी ने भूमि उपयोग, आधारभूत संरचना और भविष्य की शहरी जरूरतों से संबंधित प्रस्तुतीकरण दिया है। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने सड़क, जलनिकासी, पेयजल, पार्किंग, आवासीय एवं व्यावसायिक क्षेत्रों को लेकर सुझाव दिए हैं। प्रारूप तैयार होने के बाद नागरिकों, किसानों और अन्य हितधारकों से सुझाव एवं आपत्तियां मांगी जानी हैं। इसलिए प्रस्तावित परियोजनाओं को अभी पूरी तरह स्वीकृत या निर्माणाधीन परियोजना नहीं माना जाना चाहिए।

