सुपौल में दामिनी हत्याकांड ने फैलाई सनसनी
बिहार के सुपौल जिले में 21 वर्षीय दामिनी देवी की जलने से हुई मौत के मामले ने इलाके में सनसनी फैला दी है। दामिनी की शादी करीब 9 से 10 महीने पहले संजीव कुमार साह से हुई थी। दोनों की पहचान सोशल मीडिया के जरिए हुई थी और बाद में उन्होंने कोर्ट मैरिज की थी। आरोप है कि वैवाहिक विवाद के बाद पति ने दामिनी को पेट्रोल डालकर आग लगा दी। गंभीर रूप से झुलसी दामिनी की इलाज के दौरान मौत हो गई।
सुनसान जगह पर ले जाकर आग लगाने का आरोप
प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, 24 अक्टूबर की रात संजीव दामिनी को मोटरसाइकिल से सुपौल उपशाखा नहर के पास लालमनपट्टी इलाके में ले गया था। आरोप है कि वहां उसने दामिनी पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी। आग की लपटों में घिरी दामिनी किसी तरह ग्रामीणों तक पहुंची। स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी और उसे अस्पताल पहुंचाया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी जान नहीं बच सकी।
इंस्टाग्राम से शुरू हुई थी पहचान
दामिनी और संजीव की पहचान सोशल मीडिया पर बातचीत के दौरान हुई थी। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और उन्होंने परिवारों की परंपरागत सहमति से अलग कोर्ट मैरिज की। शुरुआती समय के बाद रिश्ते में विवाद बढ़ने की बात सामने आई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, संजीव तलाक लेना चाहता था, जबकि दामिनी इसके लिए तैयार नहीं थी।
आरोपी ने भपटियाही थाने में किया आत्मसमर्पण
घटना के बाद आरोपी संजीव साह भपटियाही थाने पहुंचा और आत्मसमर्पण कर दिया। इसके बाद उसे मामले की जांच कर रही रतनपुर पुलिस के हवाले किया गया। रिपोर्टों में आरोपी के पिता को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी गई है। पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।
मृत्यु पूर्व बयान और फॉरेंसिक साक्ष्य अहम
इस मामले में दामिनी का मृत्यु से पहले दिया गया बयान जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पुलिस घटनास्थल से मिले साक्ष्यों, फॉरेंसिक जांच और अन्य परिस्थितियों के आधार पर घटना की कड़ियां जोड़ रही है। पुलिस के सामने यह भी जांच का विषय है कि घटना से पहले दोनों के बीच क्या बातचीत हुई थी और वारदात की पूरी परिस्थितियां क्या थीं।
दहेज विवाद के दावे की पुष्टि जरूरी
सोशल मीडिया पर इस मामले को दहेज विवाद से भी जोड़कर बताया जा रहा है, लेकिन उपलब्ध प्रकाशित रिपोर्टों में तलाक और वैवाहिक मतभेद को प्रमुख वजह के रूप में उल्लेख किया गया है। दहेज प्रताड़ना के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। पुलिस जांच और अदालत की कार्यवाही के बाद ही मामले के सभी पहलू स्पष्ट होंगे।

