
मानसून में परवल की मांग और कीमतों में उछाल, सही मचान प्रबंधन से किसानों को मिलेगा अधिक मुनाफा
📍 कृषि समाचार | भारत
बरसात का मौसम परवल (Pointed Gourd) की खेती के लिए बेहद अनुकूल और फायदेमंद माना जाता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसान उन्नत किस्मों और सही तकनीक का चयन कर परवल की खेती करें, तो मात्र 90 दिनों में अच्छी और गुणवत्तापूर्ण उपज प्राप्त कर सकते हैं।
परवल की बाजार में पूरे वर्ष स्थिर मांग रहती है, लेकिन मानसून के दौरान इसकी आवक कम और मांग अधिक होने के कारण किसानों को इसके बेहतर भाव मिलते हैं। कम लागत में अधिक और निरंतर मुनाफा कमाने के इच्छुक किसानों के लिए यह एक बेहतरीन नकदी फसल साबित हो रही है।
“अच्छी जल निकासी वाली बलुई दोमट मिट्टी, समय पर संतुलित उर्वरक का प्रयोग और मचान (सहारा) विधि अपनाने से परवल के फल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों में भारी वृद्धि होती है।” — कृषि विशेषज्ञ
💡 बेहतर उत्पादन के लिए जरूरी कृषि प्रबंधन
परवल एक बेल वाली फसल है, इसलिए बरसात में इसे सड़ने और कीटों से बचाने के लिए बांस व तार की मदद से मचान बनाना अत्यंत आवश्यक है। इसके अलावा जलजमाव की स्थिति से फसल को बचाना और कवकनाशी का सही समय पर छिड़काव करना बेहद महत्वपूर्ण है।
कृषि विभाग किसानों को आधुनिक तकनीकों को अपनाने और स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) से सलाह लेकर खेती करने की सलाह दे रहा है, ताकि उपज बढ़ाकर किसानों की आय में निरंतर वृद्धि की जा सके।



