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कोसी बराज के 22 गेट खुले: 1.92 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, बिहार के 5 जिलों में बाढ़ का खतरा

📍 स्थानीय खबरें   |   September 6, 2026

बिहार में बाढ़ का खतरा एक बार फिर मंडराने लगा है। सुपौल जिले के वीरपुर स्थित कोसी बराज के 22 फाटक खोलकर 1.92 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। नेपाल से आ रहे अतिरिक्त पानी के दबाव को कम करने के लिए बराज के गेट खोलने का निर्णय लिया गया है। गुरुवार शाम को यह डिस्चार्ज बढ़कर 2.35 लाख क्यूसेक तक पहुंच गया था, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।

पांच जिलों में बाढ़ का असर, राहत कार्य जारी

कोसी बराज से छोड़े गए पानी का सबसे अधिक असर सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, खगड़िया और कटिहार जिलों में देखने को मिल रहा है। नदी किनारे के निचले इलाकों में पानी घुस गया है, जिससे कई परिवारों को अपने घरों से निकलकर ऊंची जगहों पर शरण लेनी पड़ी है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर स्थापित किए हैं, लेकिन लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण राहत कार्यों में बाधाएं आ रही हैं। गंगा, गंडक और कोसी सहित कई नदियाँ पहले से ही खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं।

प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। NDRF और SDRF की टीमें प्रभावित जिलों में तैनात हैं और राहत कार्यों में जुटी हैं। पुलिस ने नदी किनारे के इलाकों में नाकाबंदी बढ़ा दी है और लोगों को घाटों के पास जाने से रोका जा रहा है। स्थानीय प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

बिहार सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राहत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को प्रभावित इलाकों में त्वरित राहत पहुंचाने का आदेश दिया है। लगातार बारिश और नेपाल से आ रहे पानी के कारण आने वाले कुछ दिनों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है। जल संसाधन विभाग की टीमें बराज के गेटों की स्थिति पर लगातार निगरानी रख रही हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही भारी बारिश के कारण कोसी नदी में जल स्तर बढ़ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में डिस्चार्ज और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और प्रशासनिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। नदी किनारे बसे गांवों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने का काम जारी है।


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