जादवपुर विश्वविद्यालय में ABVP-SFI हिंसक भिड़ंत: ‘राष्ट्रविरोधी’ ग्रैफिटी विवाद के बीच CM ने जांच के दिए आदेश
कोलकाता के जादवपुर विश्वविद्यालय में पिछले कुछ दिनों से तनाव का माहौल है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के बीच हुई हिंसक झड़पों ने राजनीतिक हलकों में सियासी पारा और बढ़ा दिया है। विवाद की शुरुआत 19-20 अगस्त की रात को हुई, जब ABVP समर्थकों ने कथित तौर पर परिसर में घुसकर SFI के बैनर, झंडे और दीवार लेखन को नष्ट कर दिया। इस घटना के बाद से दोनों छात्र संगठनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
झड़पों की वजह और आरोप-प्रत्यारोप
ABVP का कहना है कि उनके विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष निखिल दास पर SFI समर्थकों ने हमला किया, जिसके बाद विरोध स्वरूप यह कार्रवाई की गई। वहीं, SFI और अन्य वामपंथी छात्र संगठनों का आरोप है कि ABVP ने बाहरी लोगों को बुलाकर परिसर में तोड़फोड़ की और प्रशासनिक भवन ऑरोबिंदो भवन में आग लगाने की कोशिश की। इस झड़प में कई छात्र घायल हुए और विश्वविद्यालय के प्रवेश द्वार पर लगा नंदलाल बोस द्वारा डिजाइन किया गया प्रतीक चिन्ह भी क्षतिग्रस्त हो गया। इस घटना ने परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
‘राष्ट्रविरोधी’ ग्रैफिटी विवाद और जांच के आदेश
तनाव का एक बड़ा कारण परिसर की दीवारों पर लिखे गए ग्रैफिटी को लेकर विवाद है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कथित ‘राष्ट्रविरोधी’ ग्रैफिटी की जांच के आदेश दिए हैं। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने कुछ ग्रैफिटी को सफेद कर दिया, लेकिन छात्रों ने दोबारा उन पर लेखन कर दिया। अब दक्षिणपंथी छात्र संगठन ‘नेशनलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट’ (NSF) ने भी इस ‘ग्रैफिटी युद्ध’ में कूदकर अपने समर्थन में लेखन किया है, जिससे विवाद और गहरा गया है।
विश्वविद्यालय के कुलपति चिरंजीव भट्टाचार्य ने हिंसा की निंदा की है और कहा है कि परिसर अध्ययन का स्थान है, राजनीतिक हिंसा का नहीं। उन्होंने पुलिस से संपर्क किया है, हालांकि औपचारिक शिकायत दर्ज करने में देरी हुई। वहीं, पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ABVP पर हमले का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने ABVP को अपनी छात्र इकाई नहीं बताते हुए इससे दूरी बनाई है। भाजपा नेता दिलीप घोष के ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ वाले बयान ने विवाद को और हवा दी है।
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज मांगे हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने पूर्व न्यायाधीश प्रणब कुमार चटर्जी की अध्यक्षता में एक आंतरिक जांच समिति का गठन किया है। फिलहाल इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। यह घटना शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ती राजनीतिक हिंसा की ओर इशारा करती है, जिसने छात्रों के बीच असुरक्षा की भावना पैदा कर दी है। अब सभी की निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट और प्रशासन की ओर से उठाए जाने वाले अगले कदमों पर टिकी हैं।
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